सिंधिया के सियासी ‘तूफान’ से कई राज्यों की कांग्रेस में हलचल!

Edited By Isha, Updated: 12 Mar, 2020 11:03 AM

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बेशक सत्ता और सियासत के लिहाज से मध्यप्रदेश में सियासी भूचाल आया हो लेकिन ग्वालियर राजघराने के महाराज एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कांग्रेस को अलविदा कहने.......

डेस्क : बेशक सत्ता और सियासत के लिहाज से मध्यप्रदेश में सियासी भूचाल आया हो लेकिन ग्वालियर राजघराने के महाराज एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कांग्रेस को अलविदा कहने से देश भर की कांग्रेस ‘हिलती’ नजर आने लगी है और यही वजह है कि अब कांग्रेस ने अपनी साख को बचाने के लिए मंथन शुरू कर दिया है।

सिंधिया द्वारा कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने पर बेशक कांग्रेस नेतृत्व चुप्पी साधे हुए हो मगर पार्टी के कई बड़े नेताओं जिनमें संजय निरुपम, सांसद पी.एल. पूनिया, हरियाणा के कांग्रेसविधायक कुलदीप बिश्नोई, जतिन प्रसाद, व आर.पी.एन. सिंह शामिल हैं, ने अपनी प्रतिक्रियाओं में इसे दुर्भाग्यपूर्ण व पार्टी के लिए नुकसानदायक बताते हुए पार्टी में मंथन के साथ साथ युवा नेतृत्व उभारने की सलाह दी है।  

गौरतलब है कि हरियाणा के साथ साथ पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान, हिमाचल, यू.पी. व दिल्ली में पिछले काफी समय से सियासी तौर पर ऐसी स्थिति है कि निरंतर कांग्रेस के युवा नेताओं को महत्वहीन किया जा रहा है। यही वजह है कि युवा नेतृत्व अंदर ही अंदर अंसतोष के दौर से गुजर रहा है।  राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मंगलवार को मध्यप्रदेश के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कांग्रेस छोडऩे से उक्त राज्यों के युवा कांग्रेस नेतृत्व में अंसतोष बढऩे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता था। 

शायद यही वजह है कि कांग्रेस में मंथन का जो दौर शुरू हुआ है उसके तहत हरियाण के साथ साथ पड़ोसी राज्यों राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश व दिल्ली पर विशेष फोकस भी करने की रणनीति बनाने की सलाह पार्टी नेतृत्व को दी जा रही है। हरियाणा में इसी माह की 26 तारीख को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के मद्देनजर अब जहां नई पहल करते हुए ऐसा चेहरा सामने लाने की कोशिश है तो वहीं राजस्थान में भी स्थिति को ‘सामान्य’ किया जा रहा है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सिंधिया के रूप में आए इस सियासी तूफान से कांग्रेस सबक लेते हुए अब अन्य राज्यों पर नई रणनीति के तहत काम करते हुए नजर आ सकती है। मसलन युवा चेहरों को खास तरजीह दी जा सकती है। राज्यसभा चुनाव को लेकर हरियाणा में भी कांग्रेस ऐसे युवा चेहरे को मैदान में उतार सकती है जो प्रदेश के साथ साथ दिल्ली की केंद्रीय राजनीति में भी अपना पूरा प्रभाव रखता हो।

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