Edited By Isha, Updated: 12 Jun, 2026 10:01 AM

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर सरकार ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बार-बार दी जा रही ढील और दो बड़े रिमाइंडर (याददिलाने वाले नोटिस) जारी होने के बावजूद जिन शिक्षकों ने
डेस्क: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर सरकार ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बार-बार दी जा रही ढील और दो बड़े रिमाइंडर (याददिलाने वाले नोटिस) जारी होने के बावजूद जिन शिक्षकों ने अब तक अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा (Property Return) दर्ज नहीं किया है, विभाग अब उनके खिलाफ सबसे सख्त कदम उठाने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि ऐसे लापरवाह कर्मचारियों का अगला वेतन (Salary) रोक दिया जाएगा। विभाग की ओर से इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को अंतिम चेतावनी पत्र जारी कर दिया गया है।
क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम?
नियमों के मुताबिक, सभी सरकारी कर्मचारियों को हर साल एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है। शिक्षा विभाग ने इससे पहले कर्मचारियों को दो बार मौका दिया और रिमाइंडर जारी किए, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों शिक्षकों और प्रशासनिक स्टाफ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। विभाग के बार-बार आदेशों की अवहेलना करने पर अब आला अधिकारियों ने 'नो वर्क, नो पे' की तर्ज पर 'नो रिटर्न, नो सैलरी' का सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
यदि अंतिम तय तारीख तक प्रॉपर्टी रिटर्न फाइल नहीं किया गया, तो संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) उस कर्मचारी का वेतन जारी नहीं कर पाएंगे।विभाग ने इसे कर्मचारियों के लिए आखिरी मौका बताया है। इसके बाद बिना किसी नोटिस के सीधे सैलरी रोकने की कार्रवाई की जाएगी।