Edited By Harman, Updated: 12 Aug, 2026 11:25 AM

गुरुग्राम व नूंह में बिजली सप्लाई के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से लाइसेंस लेने के लिए दायर याचिका और उस पर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा विचार किए जाने के बाद प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मुद्दा गरमा गया...
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : गुरुग्राम व नूंह में बिजली सप्लाई के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से लाइसेंस लेने के लिए दायर याचिका और उस पर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा विचार किए जाने के बाद प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मुद्दा गरमा गया है। कर्मचारी संगठन इसे बिजली विभाग के निजीकरण की दिशा में कदम मानकर विरोध कर रहे हैं।पिछले दिनों तीन दिन बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल का भी मुद्दा यही था।जिसे ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने वार्ता कर किसी प्रकार संभाला।जबकि विपक्षी दल भी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे सरकारी राजस्व और सार्वजनिक क्षेत्र के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच एचईआरसी के कार्यवाहक चेयरमैन मुकेश गर्ग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे निजीकरण नहीं माना जाना चाहिए और सरकार की भी ऐसी कोई मंशा नहीं है।
मुकेश गर्ग बोले—निजीकरण समझना गलतफहमी
मुकेश गर्ग ने कहा कि हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में यह प्रावधान है कि कोई भी थर्ड पार्टी बिजली वितरण का लाइसेंस हासिल करने के लिए नियामक आयोग के समक्ष याचिका दायर कर सकती है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने याचिका दाखिल की है। कंपनी गुरुग्राम और नूंह में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के साथ बिजली वितरण के क्षेत्र में प्रवेश करना चाहती है।उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल किसी निजी कंपनी की ओर से लाइसेंस के लिए आवेदन करने का अर्थ यह नहीं है कि सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है। फिलहाल आयोग के स्तर पर कंपनी के प्रस्ताव की जांच और उसके संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है।
सरकारी डिस्कॉम का काम पहले की तरह जारी रहेगा
एचईआरसी के कार्यवाहक चेयरमैन ने कहा कि यदि कंपनी को लाइसेंस मिलता भी है तो डीएचबीवीएन अपना काम पहले की तरह करता रहेगा। इसका मतलब यह होगा कि सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था के साथ एक निजी कंपनी भी मौजूद होगी। उपभोक्ता के सामने विकल्प उपलब्ध होगा और वह अपनी पसंद के अनुसार सेवा प्रदाता का चयन कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि बिजली की दर या टैरिफ निजी कंपनी अपनी मर्जी से निर्धारित नहीं कर सकेगी। टैरिफ तय करने का अधिकार नियामक आयोग के पास है। इसलिए उपभोक्ताओं पर मनमाने ढंग से दरें थोपे जाने की आशंका भी नहीं होनी चाहिए।
तीन सदस्यीय कमेटी कर रही कंपनी की क्षमता की जांच
मुकेश गर्ग ने बताया कि आयोग ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अपनी बात रखने का अवसर दिया था। कर्मचारी यूनियनों ने भी इस प्रक्रिया में भाग लिया है। इसके अलावा आयोग ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो इलेवन पावर की कैपेसिटी, कैपेबिलिटी और सरकार तथा आम जनता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अध्ययन कर रही है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल आयोग को कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरे मामले पर आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। इसलिए अभी से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
नौकरी जाने का डर न पालें कर्मचारी
कर्मचारी संगठनों की ओर से निजी कंपनी के आने पर कर्मचारियों की नौकरियां जाने की आशंका जताए जाने पर मुकेश गर्ग ने कहा कि कर्मचारियों को अपने मन में यह भ्रम नहीं बनाना चाहिए कि इससे किसी की नौकरी चली जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के कई शहरों, जिसमें मुंबई भी शामिल है, वहां बिजली वितरण में इस तरह की व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इलेवन पावर ने केवल कम लाइन लॉस वाले गुरुग्राम के लिए ही नहीं, बल्कि अधिक लाइन लॉस वाले नूंह जिले के लिए भी आवेदन किया है। ऐसे में कंपनी के प्रस्ताव को केवल फायदे वाले क्षेत्रों में निजी कंपनियों के प्रवेश के रूप में देखना सही नहीं होगा।
सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका पर भी स्थिति स्पष्ट
सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की विपक्ष की आशंका पर भी मुकेश गर्ग ने कहा कि पूरे मामले का अध्ययन किया जा रहा है। कमेटी यह देख रही है कि प्रस्तावित व्यवस्था का सरकार, डिस्कॉम और उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसलिए अंतिम निर्णय तथ्यों और अध्ययन के आधार पर ही किया जाएगा।उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य किसी एक पक्ष के हित में फैसला करना नहीं, बल्कि बिजली क्षेत्र में संतुलन बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
किसानों को सस्ती बिजली पर सरकार देती है सब्सिडी
किसानों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी मुकेश गर्ग ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसानों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने से डिस्कॉम को वास्तविक रूप से नुकसान नहीं होता, क्योंकि सरकार की ओर से सब्सिडी की भरपाई की जाती है। इसलिए इस व्यवस्था को बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दूसरी कंपनी की याचिका भी आयोग के पास
मुकेश गर्ग ने बताया कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड के अलावा एक अन्य कंपनी की याचिका भी आयोग के पास आई है। आयोग उस प्रस्ताव का भी अध्ययन कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी प्रस्तावों पर समान नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत विचार किया जाएगा।उन्होंने कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे नौकरी जाने के भय से भयभीत न हों। उनका कहना था कि बिजली क्षेत्र में होने वाले किसी भी बदलाव को लेकर सभी पक्षों को वास्तविक तथ्यों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि एचईआरसी का फैसला अध्ययन, कानून और जनहित के आधार पर होगा, न कि किसी दबाव में।