अस्पतालों में नहीं थम रहा दवाओं के खत्म होने का सिलसिला, बाहर से लगवाने पड़ रहे इंजैक्शन

Edited By Isha, Updated: 10 Jan, 2020 12:54 PM

process of ending medicines stopping hospitals injections

जींद के सिविल अस्पताल में दवाओं का टोटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कभी कोई दवाई तो कभी कोई दवाई खत्म हो रही है। पिछले कई दिन से सिविल अस्पताल में रैबीज इंजैक्शन फि.....

जींद (ललित) : जींद के सिविल अस्पताल में दवाओं का टोटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कभी कोई दवाई तो कभी कोई दवाई खत्म हो रही है। पिछले कई दिन से सिविल अस्पताल में रैबीज इंजैक्शन फिर से खत्म है। सिविल अस्पताल में रैबीज की डिमांड ज्यादा है। यह इंजैक्शन बंदर और कुत्ते के काटने के बाद रोगी को लगता है। रोगी को 3 इंजैक्शन जरूर लगवाने होते हैं। बाहर मार्कीट से इस इंजैक्शन की कीमत 350 रुपए से अधिक है, लेकिन सिविल अस्पताल में यह इंजैक्शन मात्र 100 रुपए है। जिला मुख्यालय पर स्थित सिविल अस्पताल में इंजैक्शन पिछले कई दिनों से खत्म हो गया है। 

हालांकि उचाना, सफीदों और अन्य कस्बों से लोग उम्मीद लेकर पहुंचते हैं कि इंजैक्शन सिविल अस्पताल में जरूर मिल जाएगा, लेकिन यहां पर उन्हें मायूसी ही हाथ लगती है। मजबूरी में लोगों को रोहतक, खानपुर या अग्रोहा पी.जी.आई. की ओर रुख करना पड़ता है या फिर मजबूरी में बाहर महंगे दामों पर इंजैक्शन लगाना पड़ता है। हर रोज 50 से ज्यादा लोग सिविल अस्पताल में रैबीज का इंजैक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। 

उचाना मंडी से सुरेंद्र के अनुसार 4 महीनों से उचाना के सिविल अस्पताल में रैबीज के इंजैक्शन नहीं है। यहां पर हर रोज 7 से 10 मरीज बंदर, कुत्तों के काटे जाने पर आते हैं। 24 घंटे के अंदर रैबीज का इंजैक्शन मरीज को लगवाना जरूरी होता है। यहां पर अगर इंजैक्शन हो तो बी.पी.एल., गुलाबी राशन कार्ड धारक को मुफ्त लगते हैं। यह राशन कार्ड अगर नहीं है तो 100 रुपए इंजैक्शन लगता है। 

बाहर से लगवाने पड़ रहे इंजैक्शन : सुनील
सुनील, अजय, राकेश व संजय ने कहा कि अधिकांश बार यहां पर रेबीज के इंजैक्शन खत्म मिलते हैं। बाहर से काफी महंगा इंजैक्शन खरीद कर मरीजों को लगवाना पड़ता है। यह सबसे जरूरी है लेकिन यह इंजैक्शन यहां पर नहीं आ रहे हैं। 

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