अधिकारियों की मिलीभगत और करोड़ों का गबन: धान घोटाले की परतें खुलीं, हैफेड का 11 करोड़ का स्टॉक साफ

Edited By Isha, Updated: 28 Mar, 2026 06:59 PM

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हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में धान घोटाले के मामलों में लगातार परतें खुल रही हैं। पिहोवा के बाद अब इस्माइलाबाद में भी बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां जगदंबा राइस मिल में भारी मात्रा में धान और बारदाना गायब

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा): हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में धान घोटाले के मामलों में लगातार परतें खुल रही हैं। पिहोवा के बाद अब इस्माइलाबाद में भी बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां जगदंबा राइस मिल में भारी मात्रा में धान और बारदाना गायब पाया गया। मामले में पुलिस ने दूसरी एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार मिल से 38,894.92 क्विंटल धान और 17,860 बैग नया बारदाना गायब मिला है। इसकी कुल कीमत करीब सवा 11 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस मामले में कार्रवाई से पहले भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी।

24 मार्च को विभागीय टीम ने मिल की फिजिकल वेरिफिकेशन की थी। रिकॉर्ड से मिलान करने पर भारी कमी सामने आई। बताया गया कि चालू खरीफ सीजन (KMS 2025-26) में हैफेड द्वारा मिल को 59,115 क्विंटल धान मिलिंग के लिए दिया गया था, लेकिन जांच में 38,894.92 क्विंटल धान कम पाया गया।

मिल मालिक समेत चार लोगों पर केस

पुलिस ने इस मामले में मिल मालिक और उनके जमानतदारों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति के गबन और अमानत में खयानत के आरोप में केस दर्ज किया है। आरोपियों में रीटा, बीर कुमार, गारंटर गौरव बंसल और मुख्तियार सिंह शामिल हैं। बीर कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन बंद मिला।

पिहोवा में पहले भी दर्ज हो चुका है मामला

इससे पहले पिहोवा में चौधरी राइस मिल के खिलाफ करीब 5.81 करोड़ रुपए के धान घोटाले का मामला दर्ज किया गया था। जांच में वहां 24,318.75 क्विंटल धान कम पाया गया था, जबकि मिल को 39,373.75 क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए दिया गया था। 25 नवंबर 2025 को चंडीगढ़ की टीम द्वारा किए गए स्टॉक चेक में उस समय पूरा स्टॉक सही पाया गया था।

6 सेक्रेटरी पर भी हुई थी कार्रवाई

करीब तीन महीने पहले जिले की विभिन्न मार्केट कमेटियों के 6 सेक्रेटरी को चार्जशीट किया गया था। इनमें थानेसर, पिहोवा, शाहाबाद, पिपली, इस्माइलाबाद और लाडवा के अधिकारी शामिल थे। इन पर आरोप था कि उन्होंने मिलर्स को गेट पास जारी करने के लिए अपने यूजर आईडी और पासवर्ड साझा किए थे, जिससे गड़बड़ियों को बढ़ावा मिला।

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