Edited By Isha, Updated: 08 Jan, 2026 10:59 AM

स्वच्छ पानी हर व्यक्ति का अधिकार है लेकिन सरकार की अनदेखी और अफसरों की ढिलाई का नतीजा है कि सभी लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिल रहा। इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान
चंडीगढ़: स्वच्छ पानी हर व्यक्ति का अधिकार है लेकिन सरकार की अनदेखी और अफसरों की ढिलाई का नतीजा है कि सभी लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी नहीं मिल रहा। इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई। इंदौर जैसे हालात हरियाणा में भी हो सकते हैं। यहां न तो भूजल की स्थिति ठीक है और न ही घरों में सप्लाई होने वाले पानी की। कई शहरों में जर्जर पाइप लाइनों में लीकेज के कारण सीवरेज का पानी भी पेयजल में मिलकर सप्लाई हो रहा है।

हरियाणा में भूजल व सतही पानी दोनों की प्रदेश के 55 फीसदी क्षेत्रफल में ट्यूबवेल (नलकूप) के जरिए जमीनी पानी की आपूर्ति होती है। शेष 45 प्रतिशत हरियाणा में नहरी पानी की आपूर्ति होती है। भूमिगत पानी की स्थिति ज्यादा खराब है। 17 जिले फ्लोराइड की समस्या से जूझ रहे हैं। नौ जिलों में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल 2025 से लेकर छह जनवरी 2026 तक हरियाणा में 25240 सैंपल लिए गए। इनमें 400 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। 2023-24 में विभिन्न जिलों से करीब 70 हजार सैंपल भरे गए जिनमें करीब सात हजार सैंपल खराब पाए गए थे। जलशक्ति मंत्रालय की 2025 की रिपोर्ट के मुताविक, भूमिगत पानी में नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक, यूरेनियम और विद्युत चालकता (ईसी) की मात्रा ज्यादा है। बहादुरगढ़ के छारा गांव में आर्सेनिक का स्तर 0.299 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला है, जो तय सीमा से 30 गुना अधिक है। भिवानी के गांव सूई और बवानीखेड़ा में आर्सेनिक का स्तर 0.2 मिलीग्राम प्रति लीटर है जो तय सीमा से 20 गुना अधिक है। पानीपत के अटावला व जींद के उचाना के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है। भिवानी के लोहारवाला में पानी में फ्लोराइड का स्तर 22 मिग्रा प्रति लीटर तक दर्ज किया गया। 1.5 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं होता।

हरियाणा में सतही पानी के दूषित होने की सबसे बड़ी वजह शहरों की पुरानी पाइप लाइन हैं। कुरुक्षेत्र के शहरी क्षेत्र की एक दर्जन कॉलोनियों में पुरानी पाइप लाइनों के कारण पीने के पानी की समस्या सामने आ रही है। इन कॉलोनियों में 60 से 70 साल पुरानी जलापूर्ति लाइनें बिछी होने से कई बार पेयजल में गंदा पानी मिक्स होकर घरों तक पहुंच रहा है। पानीपत की सात कॉलोनियों में टूटी पाइप लाइन के कारण रसायन युक्त पानी सप्लाई होता है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले चार साल में 1.27 लाख नमूने पानी के लिए हैं। इनमें से 34992 नमूने फेल आए हैं। अंबाला की 12 कॉलोनियों में 30 साल पुरानी जर्जर पाइप लाइनों से दूषित जलापूर्ति हो रही है।
रोहतक शहर में एक लाख किलोमीटर से अधिक पाइप लाइन 20 साल अधिक पुरानी है। सीवर लाइनों के साथ गुजरती पाइप लाइनों से गंदा पानी मिलकर सप्लाई होता है। शहर के चार जलघरों के टैंकों की 2017 के बाद सफाई नहीं हुई है। जलघरों में गाद, मिट्टी और काई जमा है। चालकता (ईसी) की मात्रा ज्यादा है। बहादुरगढ़ के छारा गांव में आर्सेनिक का स्तर 0.299 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला है, जो तय सीमा से 30 गुना अधिक है। भिवानी के गांव सूई और बवानीखेड़ा में आर्सेनिक का स्तर 0.2 मिलीग्राम प्रति लीटर है जो तय सीमा से 20 गुना अधिक है।

आदेशों का सख्ती से पालन नहीं
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2022 में आदेश दिए थे कि नहरों के निकट गोशालाएं संचालित नहीं होंगी। आदेश के माध्यम से नहरी पानी में गोशालाओं से निकलने वाली सामग्री को डालने से रोकना था मगर नहरी क्षेत्रों के निकट शहरों से लेकर गांवों में गोशालाएं चल रही हैं।
निकायों को शहरी क्षेत्र से डेयरियों को शिफ्ट करना था। शहर के अंदर डेयरियों के संचालन से सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या रहती है। इस कारण से सीवरेज लाइन बंद होने से दूषित पानी की आपूर्ति होती है। एनजीटी के इस आदेश पर भी पूरी तरह से अमल नहीं हो सका है। पानीपत के अटावला व जींद के उचाना के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है। भिवानी के लोहारवाला में पानी में फ्लोराइड का स्तर 22 मिग्रा प्रति लीटर तक दर्ज किया गया। 1.5 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं होता।