धोती-कुर्ता पहन 42 किमी दौड़ा हरियाणा का 'सिक्स पैक ताऊ', मैराथन में जीता Gold मेडल...

Edited By Manisha rana, Updated: 23 Feb, 2026 05:28 PM

haryana s six pack tau wins gold medal in marathon

हरियाणा को पहलवानों की धरती क्यों कहा जाता है और ये हम नहीं बल्कि यहां की धरती ने ऐसे ऐसे पहलवानों को जन्म दिया है जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया लेकिन सोनीपत के गांव जठेड़ी के रहने वाले संजय 55 साल की उम्र में ऐसे ऐसे पहलवानों...

सोनीपत (सन्नी मलिक) : हरियाणा को पहलवानों की धरती क्यों कहा जाता है और ये हम नहीं बल्कि यहां की धरती ने ऐसे ऐसे पहलवानों को जन्म दिया है जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया लेकिन सोनीपत के गांव जठेड़ी के रहने वाले संजय 55 साल की उम्र में ऐसे ऐसे पहलवानों को मात देने की हिम्मत रखते है जोकि मिट्टी के अखाड़े से लेकर मेट पर देश का नाम रोशन कर चुके है। हाल में ही इन्होंने दिल्ली में आयोजित मैराथन में गोल्ड मेडल जीता है।

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हाल में ही इनकी कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है और ये खेल के मैदान में अच्छे-अच्छे धावकों को पिछड़ते हुए नज़र आ रहे हैं और साथ-साथ में सपाटे मारने में भी इनका इस उम्र में कोई सानी नज़र नहीं आ रहा है। ये घर में ही कसरत करते हुए अपने आपको फिट रखते है और खेल मैदान में इनकी रफ्तार को देखकर अच्छे-अच्छे बॉडी बिल्डर भी दांतों तले उंगली दबा लेते है। संजय ताऊ को बचपन में पहलवान बनने का सपना था लेकिन कुछ कारणों से ये पहलवान तो नहीं बन पाए लेकिन जब अपने बेटे को अखाड़े में लेकर पहुंचे तो इन्होंने भी अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया। उसके बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब ये सोशल मीडिया सेंसेशन बनकर उभरते हुए नज़र आ रहे हैं। ताऊ संजय की कहानी उनकी ही जुबानी सुनाने से पहले आप ये तस्वीरें देख कर खुद ही अंदाजा लगा सकते हो कि कैसे इन्होंने अपने आपको फिट रखा है। 

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हरियाणवी ताऊ संजय उर्फ काला ने कहा कि बचपन से होने पहलवान बनने का शौक था, लेकिन घर के हालात इतने ज्यादा ठीक नहीं थे जिस कानून ने अपने शौक को दबा दिया और अब जब वह अपने बेटे के साथ ग्राउंड में जाने लगे तो उनकी इच्छा एक बार फिर जगी और उन्होंने वहां पर अपनी प्रैक्टिस शुरू की। वह घर पर ही अपने देसी सामान से अपनी प्रैक्टिस करते हैं। रोजाना तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करते हैं और घर से ही अपनी डाइट का ध्यान रखते हैं। फिलहाल वह दिल्ली में 45 किलोमीटर की रेस जीतकर वापस आए हैं और अब उनका सपना 100 किलोमीटर की रेस जितना है। संजय ने कहा कि आज के युवा को एक संदेश देना है कि वह चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं। 

 

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