सारी जिंदगी भीख मांगकर गुजारा किया, अब लखपति निकला भिखारी... ऐसे हुआ ये बड़ा खुलासा

Edited By Isha, Updated: 19 Feb, 2026 05:47 PM

he spent his entire life begging now a millionaire turned beggar

शहर की सबसे व्यस्त रेलवे रोड पर हनुमान मंदिर के सामने पिछले करीब दस वर्षों से एक ट्राइसाइकिल पर बैठा कमजोर और बुजुर्ग व्यक्ति लोगों की नजरों में रहता था। हाथ में कटोरा लिए वह राहगीरों से भीख मांगता था

अंबाला(अमन):   शहर की सबसे व्यस्त रेलवे रोड पर हनुमान मंदिर के सामने पिछले करीब दस वर्षों से एक ट्राइसाइकिल पर बैठा कमजोर और बुजुर्ग व्यक्ति लोगों की नजरों में रहता था। हाथ में कटोरा लिए वह राहगीरों से भीख मांगता था। ट्राइसाइकिल के पीछे लोहे का एक छोटा ट्रंक बंधा रहता था, जिसमें लोग सिक्के और कभी-कभार नोट भी डाल देते थे।

 पूरी उम्र यूं ही गुजर गई, लेकिन मौत के बाद उसकी सच्चाई ने सबको चौंका दिया वह लाखों का मालिक निकला। लेखराज नाम का यह व्यक्ति भले ही भीख मांगकर गुजारा करता था, लेकिन उसकी ट्राइसाइकिल की तलाशी लेने पर नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। एक गड्डी में 50 हजार रुपये और दूसरी में 16,120 रुपये मिले। इसके अलावा उसके पास दोअलग-अलग बैंकों की पासबुक की प्रतियां भी मिलीं। जांच में सामने आया कि एक खाते में 3.32 लाख रुपये जमा थे, जबकि दूसरे खाते में 434 रुपये शेष थे। जानकारी देते हुए वंदे मातरम दल के सदस्य भरत ने बताया कि 9 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर किसी राहगीर ने सामाजिक संगठन वंदेमातरम दल को सूचना दी।

 टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सड़क से उठाया और नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया। तीन दिन तक चले उपचार के बाद उसकी अस्पताल में मृत्यु हो गई। महाशिवरात्रि के दिन संगठन की ओर से उसका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उसका कोई परिजन मौजूद नहीं था।पुलिस ने ट्राइसाइकिल से बंधे ट्रंक की जांच की तो उसमें कंबल, छाता, हवा भरने का पंप और दो जोड़ी कपड़ों के साथ नकदी मिली। 500-500 रुपये के नोटों की 50 हजार की गड्डी पर बैंक ऑफ इंडिया की मुहर थी, जो अक्टूबर में निकाले गए थे। इसके अलावा 16,120 रुपये अलग से मिले, जिनमें 500 के 32 नोट और बाकी खुले रुपये थे। यह रकम भी उसी बैंक से निकाली गई थी।

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