Edited By Isha, Updated: 19 Feb, 2026 06:09 PM

हरियाणा में अब कुछ किसान रसायन खेती को छोड़कर आर्गेनिक और प्राकृतिक खेती की तरह बढ़ रहे हैं। और ऑर्गेनिक खेती में वह एक से एक कमाल भी कर रहे हैं। ऐसे ही दो किसान भाई कुरुक्षेत्र के अमीन (अभिमन्यपुर) गांव के रहने वाले हैं। जो अपने खेत में अपने खुद के...
कुरुक्षेत्र (रणदीप): हरियाणा में अब कुछ किसान रसायन खेती को छोड़कर आर्गेनिक और प्राकृतिक खेती की तरह बढ़ रहे हैं। और ऑर्गेनिक खेती में वह एक से एक कमाल भी कर रहे हैं। ऐसे ही दो किसान भाई कुरुक्षेत्र के अमीन (अभिमन्यपुर) गांव के रहने वाले हैं। जो अपने खेत में अपने खुद के खाने के लिए किचन गार्डन ऑर्गेनिक तरीके से चल रहे हैं और उसमें ऑर्गेनिक सब्जियों तैयार कर रहे हैं। लेकिन उनके किचन गार्डन की सबसे बड़ी बात यह है कि वह इसमें 8 किलोग्राम तक की सरगम तैयार कर रहे हैं।
कुरुक्षेत्र के अमीन गांव के किसान अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि वह खेती करने का शौक रखते हैं पिछले 45 साल से वह अपने भाई के साथ मिलकर खेती कर रहे हैं। करीब 30 एकड़ में वह खेती कर रहे हैं लेकिन कुछ खेत में जगह उन्होंने ऑर्गेनिक किचन गार्डन के लिए रखी हुई है जिस पर वह किसी भी प्रकार का रसायन का प्रयोग नहीं करते। उन्होंने अपने इस किचन गार्डन में 8 किलोग्राम की शलगम तैयार की है जिसका पत्तों के साथ 15 किलोग्राम वजन मिला था।

8 किग्रा की वजन वाली शलगम देखकर हर कोई हुआ हैरान
अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती का ही कमाल है जो इतनी बड़ी शलगम उनके खेत में तैयार हुई है उन्होंने कहा कि उन्होंने इस शलगम को सर्दियों के सीजन में अपने खेत में लगाया था अक्टूबर महीने में उन्होंने इसकी रोपाई की थी इसमें पानी की लागत भी बहुत कम होती है। हालांकि जब उनके खेत में यह लगी हुई थी तब उन्होंने नहीं सोचा था कि इसका इतना वजन होगा लेकिन जब उन्होंने इसको अपने खेत से उखाड़ कर गांव में जाकर इसका भजन किया तो हर कोई इस शलगम को देखकर हैरान हो गया वह खुद भी सोचते थे कि यह तीन से चार किलोग्राम तक की होगी लेकिन जब जाकर इसका वजन किया तो हर कोई इसके बारे में सुनकर इसको देखने के लिए दूर-दूर से उनके घर पर पहुंचने लगे और हर कोई उनके इस अद्भुत खेती की तारीफ करने लगे।

9 फरवरी को खेत से उखाड़ी थी शलगम
किसान अश्वनी कुमार शर्मा के भाई राजीव शर्मा ने बताया कि हमने इस शलगम को अपने खेत से 9 फरवरी को उखाड़ा था। उस समय इसके पत्तों के साथ इसका वजन 15 किलोग्राम था पत्ते काटकर इसका वजन 8 किलोग्राम निकाला जबकि पत्तों का वजन 7 किग्रा था। हर कोई इसको देखकर हैरान है वह खुद भी इसको देखकर हैरान थे जब रिश्तेदारों को इसकी बात पता चली तो उन्होंने कुरुक्षेत्र शहर में इसको देखने के लिए अपने घर पर मंगवाया और वहीं पर कुछ दिन रखा। उनके रिश्तेदारों के घर पर शहर में भी बहुत लोग उसको देखने के लिए आए थे। हालांकि करीब 10 दिन पहले इसको उखाड़ने के बाद अब इसका एक किलोग्राम वजन कम हो गया है जब इसका कांटे पर वजन किया गया तो 7 किलोग्राम मिला क्योंकि ताजी सब्जी का वजन ज्यादा होता है। 10 दिनों में 1 किलोग्राम वजन कम हो गया लेकिन फिर भी है दूसरे शलगम से काफी बड़ी है। उन्होंने कहा कि उनको खेती करते हुए करीब 35 साल हो गए हैं उन्होंने कभी इतनी बड़ी शलगम अपनी जिंदगी में नहीं देखी है।
किचन गार्डन में पहले भी कर चुके अच्छी सब्जी तैयार
उन्होंने बताया कि वह अपने किचन गार्डन में हर मौसम की सब्जी लगते हैं जो शुद्ध ऑर्गेनिक होती है। वह मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जी लगते हैं पहले भी उनकी इस किचन गार्डन में लगाई हुई सब्जियां काफी अच्छी हुई है। पहले भी उन्होंने करीब चार किलोग्राम का चुकंदर, 6 किग्रा की मूली , 3 किलोग्राम से ऊपर पत्ता गोभी और फूलगोभी भी अपने इस किचन गार्डन से ली हुई है। लेकिन अब इस शलगम ने उनको और भी ज्यादा मशहूर कर दिया है क्योंकि आज तक कितनी बड़ी शलगम ना ही उन्होंने कभी देखी और ना ही सुनी है। उन्होंने कहा कि वह अपने खाने के लिए इस किचन गार्डन में गन्ना , हरी सब्जियां, प्याज , फल फ्रूट सभी लगाए हुए हैं। उन्होंने अपने खेत में असम राज्य की एक वैरायटी का नींबू का पौधा भी लगाया हुआ है जिसकी ग्रोथ भी काफी अच्छी है और वह अभी बंपर पैदावार दे रहा है करीब ढाई साल कब है पौधा है जिसे एक कुंटल उत्पादन वह ले रहे हैं।

करीब 25 सालों से कर रहे ऑर्गेनिक फार्मिंग
उन्होंने बताया कि वह दोनों भाई मिलकर खेती करते हैं उनका परिवार इकट्ठा रहता है बीमारियों से बचने के लिए वह खुद के खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन कर रहे हैं हालांकि बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक खेती करना चाहते हैं लेकिन मार्केटिंग की समस्या की वजह से वह बड़े स्तर पर इसको नहीं कर पाते इसलिए वह अपने खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन चला रहे हैं। उनको 25 साल हो गए इस किचन गार्डन में उन्होंने आज तक कभी रसायन नहीं डाला , वह इसमें गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं और अब उनकी पैदावार और उत्पादन भी और रसायन खेती से काफी अच्छा मिलता है। हालांकि शुरुआती कुछ सालों में उत्पादन कुछ काम रहता है लेकिन अब वह इससे अच्छा उत्पादन ले रहे हैं।
ऑर्गेनिक खेती से ही हो पाया यह संभव, ऑर्गेनिक खेती के चलते पहले भी रह चुके प्रोग्रेसिव फार्मर
उन्होंने कहा कि साधारण खेती हर कोई करता है लेकिन 8 किलोग्राम की शलगम तैयार होना यह सिर्फ ऑर्गेनिक खेती में ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि 8 किलोग्राम की शलगम तैयार करने से उनको एक नई पहचान मिली है वह पहली बार 1995 में ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए सरकारी कृषि संस्थान में गए थे और तब से ही वह इस खेती को करते आ रहे हैं इसमें उनका कई इमारत पहले सरकार और कृषि विभाग के संस्थानों के द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है उन्होंने कहा कि काफी अच्छा लगता है जब आप दूसरे किसानों से बेहतर करते हैं और आपकी हर जगह तारीफ होती है इसलिए वह दूसरे किसानों से भी कहते हैं कि कम से कम अपने खाने के लिए ऑर्गेनिक खेती जरूर करें ऑर्गेनिक खेती से हमारी मिट्टी के उपजाऊ शक्ति भी बनी रहती है और हमारे मित्र कीट भी उसमें रहते हैं जिसे उत्पादन में कुछ सालों बाद अच्छी वृद्धि होती है और हम बिना जहर के फल और सब्जियों का सकते हैं।