Edited By Isha, Updated: 24 Feb, 2026 12:37 PM

जिले के दडवा गांव में रहने वाले सौरभ गुर्जर ने अपनी शादी को सादगी और सामाजिक संदेश का माध्यम बना दिया। सौरभ ने दुल्हन पक्ष से दहेज के नाम पर महज 1 रुपया स्वीकार किया और साफ शब्दों में कहा कि शा
यमुनानगर(परवेज खान): जिले के दडवा गांव में रहने वाले सौरभ गुर्जर ने अपनी शादी को सादगी और सामाजिक संदेश का माध्यम बना दिया। सौरभ ने दुल्हन पक्ष से दहेज के नाम पर महज 1 रुपया स्वीकार किया और साफ शब्दों में कहा कि शादी कोई सौदा नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र रिश्ता है। सौरभ गुर्जर पिछले तीन साल से इंग्लैंड के लंदन शहर में नौकरी कर रहे हैं। वे MSC पास हैं और अच्छी नौकरी में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी सोनिया BSC ग्रेजुएट हैं। पढ़े-लिखे इस जोड़े ने यह साबित कर दिया कि असली शिक्षा वही है जो समाज को सही दिशा दे।
सौरभ दो भाइयों में छोटे हैं और उनके पिता नरेश गुर्जर ने भी इस फैसले में उनका पूरा साथ दिया। नरेश ने कहा कि उन्हें कभी दहेज का लालच नहीं रहा। उनके अनुसार, उन्हें केवल संस्कारी और अच्छे स्वभाव वाली बहू चाहिए थी। उन्होंने साफ कहा कि वे लड़की पक्ष पर किसी भी प्रकार का आर्थिक दबाव नहीं डालना चाहते थे। वहीं सौरभ का कहना है कि उन्होंने शुरू से ही तय कर लिया था कि वे बिना दहेज के शादी करेंगे। उनका मानना है कि दहेज एक सामाजिक बुराई है, जिसे जड़ से खत्म करने की जरूरत है।
अगर पढ़े-लिखे युवा आगे आकर पहल करें, तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। इस शादी की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। गांव और समाज के लोग सौरभ और उनके परिवार की सराहना कर रहे हैं। यह विवाह केवल दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है कि रिश्ते पैसों से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और संस्कारों से बनते हैं।