Edited By Isha, Updated: 24 Feb, 2026 12:57 PM

हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में आज उस वक्त बड़ी सियासी हलचल देखने को मिली जब नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा HPSC (हरियाणा लोक सेवा आयोग) और HSSC (हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग) की भर्तियों
चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में आज उस वक्त बड़ी सियासी हलचल देखने को मिली जब नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा HPSC (हरियाणा लोक सेवा आयोग) और HSSC (हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग) की भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर लाया गया काम रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया।
शुरुआती गतिरोध और विपक्ष के वॉकआउट के बाद, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हटेगी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने नियमों के तहत इस संवेदनशील मुद्दे पर बहस की अनुमति दे दी।
हुड्डा ने दावा किया कि हाल की कई बड़ी भर्तियों (जैसे असिस्टेंट प्रोफेसर) में चयनित उम्मीदवारों में से 8% से भी कम हरियाणा के निवासी हैं। उन्होंने आयोग को "गैर-हरियाणवी सर्विस कमीशन" तक कह डाला। विपक्ष ने आरोप लगाया कि HPSC ने असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा में बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के प्रश्नपत्रों से सवाल सीधे कॉपी किए हैं। आरोप लगाया गया कि 11 सालों में हजारों पदों के लिए विज्ञापन निकालने के बाद उन्हें बिना किसी ठोस कारण के वापस ले लिया गया।
सरकार की सफाई: "बिना पर्ची-बिना खर्ची का शासन"
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल में रिकॉर्ड तोड़ पारदर्शी भर्तियां की हैं। विपक्ष युवाओं को गुमराह कर रहा है और चर्चा के बजाय सदन से भागने की कोशिश करता है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चुनौती दी कि वे चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रहें और खाली कुर्सियों को जवाब देने की स्थिति पैदा न करें।
क्या है 'काम रोको प्रस्ताव' का महत्व?
विधानसभा की कार्यवाही में 'काम रोको प्रस्ताव' का मंजूर होना एक महत्वपूर्ण घटना है। इसका अर्थ है कि सदन के अन्य सभी पूर्व-निर्धारित कार्यों को रोककर केवल इस विषय पर गहन चर्चा की जाएगी। यह विपक्ष के लिए एक बड़ी विधायी जीत मानी जा रही है।