मानेसर लैंड स्कैम: सुनवाई के लिए हुड्डा कोर्ट में नहीं हुए पेश, आरोपों पर 5 घंटे हुई बहस

Edited By vinod kumar, Updated: 18 Oct, 2019 05:53 PM

manesar land scam hooda did not appear in court for hearing

मानेसर लैंड सकैम मामले में आज पांच घटों तक आरोपों पर बहस हुई। मामले की सुनवाई पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट में हुई। हालांकि मामले के मुख्य आरोपी व पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा आज किन्ही कारणों के चलते कोर्ट में पेश नहीं हो पाए।

पंचकूला(उमंग): मानेसर लैंड स्कैम मामले में आज पांच घटों तक आरोपों पर बहस हुई। मामले की सुनवाई पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट में हुई। वहीं इस मामले के मुख्य आरोपी व पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंद्र हुड्डा आज किन्ही कारणों के चलते कोर्ट में पेश नहीं हो पाए। इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से आज सीबीआई कोर्ट में हुड्डा की उपस्थिति से छूट की अर्जी लगाई गई। 

हुडडा को छोड़कर इस मामले के अन्य सभी 33 आरोपी आ कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान आरोपियों के आरोपों पर पांच घंटे तक बहस हुई। बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी आरोपियों पर आरोपों को लेकर बहस शुरू जो चुकी है। यह बहस आज भी जारी रही। अब मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी। 4 नवंबर को भी अरोपों पर बहस जारी रहेगी। 

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित 34 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई थी। अब इस मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसमें हुड्डा के अलावा एमएल तायल, छतर सिंह, एसएस ढिल्लो, पूर्व डीटीपी जसवंत सहित कई बिल्डरों के खिलाफ चार्ज शीट में नाम आया है। 

मानेसर जमीन घोटाले को लेकर सीबीआइ ने हुड्डा सहित 34 के खिलाफ 17 सितंबर 2015 को मामला दर्ज किया था। इस मामले में ईडी ने भी हुड्डा के खिलाफ सितंबर 2016 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ सीबीआई की एफआइआर के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया था। 

वहीं कांग्रेस लगातार इस कार्यवाही को सियासी रंजिश का नाम दे रही है। इस मामले में आरोप है कि अगस्‍त 2014 में निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात जनसेवकों के साथ मिलीभगत कर गुडग़ांव जिले में मानसेर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों के किसानों और भूस्वामियों को अधिग्रहण का भय दिखाकर उनकी करीब 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली थी। हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डर्स को औने-पौने दाम पर बेचने का आरोप है।

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