इस वजह से छत्रपति हत्याकांड से बरी हुआ राम रहीम, कोर्ट ने मान लीं दलीलें

Edited By Manisha rana, Updated: 07 Mar, 2026 11:15 AM

this is why ram rahim was acquitted in the chhatrapati murder case

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम को बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने 3 आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने यह फैसला आरोपियों द्वारा सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर...

हरियाणा डेस्क : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम को बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने 3 आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने यह फैसला आरोपियों द्वारा सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के बाद सुनाया। 

राम रहीम हुआ बरी 

बता दें कि अदालत ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा मुखी के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वहीं, अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उनकी दोषसिद्धि और सजा को कायम रखा गया है।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से विस्तृत बहस की गई। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि डेरा मुखी के खिलाफ अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में संलिप्तता को संदेह से परे साबित किया जा सके। वहीं तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत ने पाया कि उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित होती है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया।

गोली मारकर की थी छत्रपति की हत्या 

मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसने अपने समय में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद वर्ष 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी और मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद मामले में डेरा मुखी सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

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