Breaking: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या के मामले में राम रहीम बरी, अन्य 3 दोषियों की उम्रकैद बरकरार

Edited By Manisha rana, Updated: 07 Mar, 2026 10:47 AM

ram rahim acquitted in journalist ramchandra chhatrapati murder case

इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab Haryana Highcourt) से डेरा प्रमुख राम रहीम को बड़ी राहत मिली है।

हरियाणा डेस्क : बहुचर्चित छत्रपति हत्याकांड मामले में डेरा मुखी को बड़ी राहत मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आज सुबह सीबीआई अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए डेरा मुखी को इस मामले से बरी कर दिया है। हालांकि अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए अन्य तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट ने यह फैसला आरोपियों द्वारा सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा मुखी के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वहीं, अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उनकी दोषसिद्धि और सजा को कायम रखा गया है।

साल 2002 में गोली मारकर की थी छत्रपति की हत्या 

मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसने अपने समय में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद वर्ष 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी और मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद मामले में डेरा मुखी सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से विस्तृत बहस की गई। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि डेरा मुखी के खिलाफ अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश में संलिप्तता को संदेह से परे साबित किया जा सके। वहीं कुलदीप, निर्मल और किशन लाल के खिलाफ अदालत ने पाया कि उनके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित होती है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया।

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