बर्गर खाने के शौक से खुला ब्लाइंड मर्डर का राज, रूममेट को उम्रकैद...महाराष्ट्र से नौकरी की तलाश में कुरुक्षेत्र आया था CA सागर

Edited By Isha, Updated: 10 Jul, 2026 08:05 PM

love for burgers leads to solving a blind murder case

करीब तीन साल पहले शाहाबाद में मिले एक अज्ञात युवक के शव से शुरू हुई ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) सागर की हत्या

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा): करीब तीन साल पहले शाहाबाद में मिले एक अज्ञात युवक के शव से शुरू हुई ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) सागर की हत्या के मामले में उसके रूममेट विक्टर जोन मैनटैरियो उर्फ सोनू, निवासी सांईचरण, कोपरखेना, नई मुंबई (महाराष्ट्र) को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला इसलिए भी चर्चित रहा क्योंकि शुरुआत में पुलिस के पास न तो मृतक की पहचान थी और न ही हत्या का कोई ठोस सुराग। लेकिन बेटे की तलाश में जुटे पिता की कोशिशों और पुलिस की तकनीकी जांच ने इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझा दी।

निर्माणाधीन बिल्डिंग के पास मिला था शव
4 अप्रैल 2023 की सुबह करीब साढ़े नौ बजे रतनगढ़ निवासी अमरजीत खेतों की ओर जा रहे थे। इसी दौरान शाहाबाद क्षेत्र में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के पास उन्हें एक युवक का शव पड़ा मिला। मृतक ने नीली जींस और मैरून टी-शर्ट पहन रखी थी तथा उसके गले में लाल रंग का रस्सीनुमा कपड़ा बंधा हुआ था। प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का पाया गया।

शाहाबाद थाना पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर शव को 72 घंटे तक पहचान के लिए एलएनजेपी अस्पताल की मोर्चरी में रखा, लेकिन कोई परिजन सामने नहीं आया। इसके बाद पोस्टमार्टम कर नियमानुसार अज्ञात शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बाद में मामले की जांच सीआईए-2 को सौंप दी गई।

बर्गर खाने की आदत बनी सबसे बड़ा सुराग
उधर, महाराष्ट्र में सागर के पिता मनीष कुमावत लगातार अपने बेटे की तलाश कर रहे थे। उन्होंने सागर का बंद मोबाइल नंबर दोबारा जारी करवाकर उपयोग करना शुरू किया। कुछ समय बाद शाहाबाद से एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने बताया कि वह सागर को जानता था और उसके कुछ पैसे देने हैं, क्योंकि सागर अक्सर उसके यहां बर्गर खाने आता था। यही फोन कॉल पूरे मामले का पहला बड़ा सुराग साबित हुआ। अनहोनी की आशंका होने पर मनीष कुमावत शाहाबाद पहुंचे और पुलिस से संपर्क किया। उन्होंने बेटे की तस्वीर और कपड़ों के आधार पर शव की पहचान सागर के रूप में की, हालांकि तब तक उसका अंतिम संस्कार किया जा चुका था।

कॉल डिटेल से आरोपी तक पहुंची पुलिस
सीआईए-2 ने सागर की कॉल डिटेल खंगाली तो सामने आया कि उसकी सबसे अधिक बातचीत रूममेट विक्टर जोन मैनटैरियो उर्फ सोनू से होती थी। सागर के पिता और भाई ने भी उसी पर शक जताया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई और 16 मई 2023 को आरोपी की मोबाइल लोकेशन चंडीगढ़ में मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने पैसे के विवाद के चलते सागर की हत्या करना स्वीकार कर लिया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए।

नौकरी की तलाश में आया था सागर
सागर महाराष्ट्र का रहने वाला चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) था और नौकरी की तलाश में कुरुक्षेत्र आया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतक के पिता ने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास तथा 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया कि तकनीकी जांच, कॉल रिकॉर्ड और एक मामूली-सा सुराग भी किसी ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकता है।

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