हरियाणा की 10 यूनिवर्सिटियों से सरकार ने मांगा डेटा, जानें क्या है वजह

Edited By Isha, Updated: 10 Jul, 2026 07:52 PM

government seeks data from 10 universities in haryana

हरियाणा सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत संविदा सहायक प्रोफेसरों और अन्य संविदा कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश की 10 रा

कुरुक्षेत्र,(कपिल शर्मा): हरियाणा सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत संविदा सहायक प्रोफेसरों और अन्य संविदा कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश की 10 राज्य विश्वविद्यालयों से तीन दिन के भीतर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। समय पर रिपोर्ट नहीं देने की स्थिति में संबंधित विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को उच्च शिक्षा महानिदेशक (DGHE) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर देरी का कारण बताना होगा।

विभाग के अनुसार इससे पहले 1 जुलाई को भी आवश्यक जानकारी मांगी गई थी, लेकिन कई विश्वविद्यालयों से रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर 8 जुलाई को दोबारा रिमाइंडर जारी किया गया है। सरकार प्रस्तावित हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय संविदात्मक व्याख्याता (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2026 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटी है।

विभाग ने विश्वविद्यालयों से संविदा कर्मचारियों की संख्या, नियमित स्वीकृत पदों का विवरण, प्रस्तावित कानून लागू होने पर सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय भार का आकलन तथा अन्य आवश्यक जानकारियां मांगी हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी तथा 50 हजार रुपये से कम वेतन पाने वाले शिक्षण कर्मचारी मौजूदा सेवा सुरक्षा कानूनों के दायरे में आते हैं या नहीं।

जिन विश्वविद्यालयों से जानकारी मांगी गई है उनमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, गुरुग्राम विश्वविद्यालय तथा महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय शामिल हैं।

इस बीच हरियाणा विश्वविद्यालय संविदा शिक्षक संघ (HUCTA) ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक संकेत बताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विजय मलिक ने उम्मीद जताई कि राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत करीब 1400 संविदा सहायक प्रोफेसरों को भी सरकारी कॉलेजों के विस्तार व्याख्याताओं की तर्ज पर सेवा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।


 

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