हरियाणा में नर्सरियों से बेचे जाने वाली पौध पर लगेगा QR कोड, बिना लाइसेंस संचालन पर रोक...नर्सरी के लिए नए नियम लागू

Edited By Isha, Updated: 02 Jul, 2026 10:42 AM

qr codes to be affixed to saplings sold by nurseries in haryana

अब बिना लाइसेंस कोई भी बागवानी नर्सरी संचालित नहीं की जा सकेगी। पहली बार फलदार पौधे पर वॉटरप्रूफ लेबल या क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य किया गया है। इससे पौधे की पहचान सुनिश्चित होगी।

चंडीगढ़: अब बिना लाइसेंस कोई भी बागवानी नर्सरी संचालित नहीं की जा सकेगी। पहली बार फलदार पौधे पर वॉटरप्रूफ लेबल या क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य किया गया है। इससे पौधे की पहचान सुनिश्चित होगी।

फलदार पौधों की नर्सरी के लिए 20 हजार रुपये और अन्य पौधों की नर्सरी के लिए 10 हजार रुपये लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग ने हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी नियम-2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों का उद्देश्य किसानों और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराना है।

लाइसेंस के लिए आवेदन केवल hortharyana.gov.in पर ऑनलाइन किया जाएगा। प्रत्येक लाइसेंस पांच वर्ष के लिए मान्य रहेगा। नवीनीकरण शुल्क फलदार पौधों के लिए 10 हजार रुपये और अन्य पौधों के लिए 5 हजार रुपये होगा। 

प्रभावित किसान को दोगुने तक मुआवजा 
किसान या खरीदार गलत किस्म, घटिया या संक्रमित पौधा मिलने पर सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकता है। यदि नर्सरी संचालक बिल में दर्ज किस्म के बजाय दूसरी किस्म या घटिया पौधा बेचता है तो प्रभावित खरीदार को मुआवजा मिलेगा। फलदार व अन्य बागवानी पौधों के मामले में खेती की लागत के बराबर या अधिकतम दोगुना मुआवजा दिया जा सकेगा।
 

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