हथिनी कुंड बैराज को 23 वर्ष में ही होने लगा खतरा जबकि अंग्रेजों का बनाया गया ताजेवाला हेड वर्क्स 120 वर्ष तक रहा सुरक्षित

Edited By Vivek Rai, Updated: 25 May, 2022 09:07 PM

hathini kund barrage was threatened in 23 years

देश के 5 राज्यों में पानी का बंटवारा करने वाला हथिनी कुंड बैराज सुरक्षित नहीं है। बैराज को खतरा होने लगा है। अगर जल्दी ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में भारी तबाही हो सकती है।

चंडीगढ़(धरणी): देश के 5 राज्यों में पानी का बंटवारा करने वाला हथिनी कुंड बैराज सुरक्षित नहीं है। बैराज को खतरा होने लगा है। अगर जल्दी ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में भारी तबाही हो सकती है। हथिनी कुंड बैराज जो मात्र 23 वर्ष पहले बनाया गया था । वही अंग्रेजों ने ताजेवाला हेडवर्क्स को 1878 में बनाया था, जिसे 100 साल के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन ताजेवाला हेडवर्क्स 1999 तक सुरक्षित रहा। इस दौरान 1978, 1998 व 2010 में आई भयंकर बाढ़ ने ताजेवाला को भारी क्षति पहुंचाई। 2010 में तो ताजेवाला हेडवर्क्स का बचा हुआ स्ट्रक्चर भी बह गया था।

यमुनानगर में हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड सीमा पर स्थित हथिनी कुंड बैराज का निर्माण 9 जुलाई 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने करवाया था। यह बैराज रिकॉर्ड 3 वर्ष में तैयार करवाया गया था। 1999 के बाद लगातार आने वाली बाढ़ से इस बैराज का रिवर बेड लगातार नीचे जा रहा है। इस बैराज से नीचे ताजेवाला में 2010 में आई बाढ़ में ताजेवाला हेड वर्क्स का स्ट्रक्चर बह गया था। उसके बाद इस बैराज का बेड और भी नीचे जा चुका है। 1999 में जब इस बैराज का निर्माण हुआ था उस समय इसका रिवर बेड 329 मीटर पर था। जबकि इस समय यह 14 मीटर नीचे जा चुका है।  बैराज की कटेन वाल 310 मीटर पर है, मात्र 4 मीटर नीचे। इसी को लेकर सिंचाई विभाग कि अधिकारी लगातार इस बैराज को बचाने के लिए सभी उपाय कर रहे हैं।

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बैराज का निर्माण सेंट्रल वाटर कमीशन द्वारा डिजाइन के आधार पर किया गया था। इसलिए विभाग के अधिकारी लगभग डेढ़ वर्ष पहले सेंट्रल वाटर कमीशन के पास गए थे। ताकि इस समस्या का समाधान ढूंढा जा सके। सेंट्रल वाटर कमीशन ने इसको लेकर सैट्रल वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन (सीडब्ल्यूपीआरएस) पुणे को स्टडी के लिए मामला भेजा। पुणे से रिपोर्ट आने के बाद सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। जिसमें विभाग के चीफ इंजीनियर एवं एडवाइजर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस मीटिंग में यह तय किया गया कि बैराज से 550 मीटर नीचे एक समर्सिबल वेयर बनाएंगे।

इसे सेंट्रल वाटर कमीशन डिजाइन कर रहा है। जैसे ही यह डिजाइन तैयार हो जाएगा उसके बाद सिंचाई विभाग इस पर काम शुरू कर देगा। आगामी महीने मानसून सीजन शुरू होने वाला है। जिसके बाद बैराज को बचाने का यह कार्य अगले वर्ष ही शुरू हो पाएगा। सिंचाई विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर आर एस मित्तल का कहना है कि अगले 2 महीने में सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। उसके बाद अगले सीजन से पहले काम शुरू हो जाएगा।

बैराज का रिवर बेड इतनी तेजी से नीचे आने के कारणों के बारे में आर एस मित्तल का कहना है कि जब यमुना में पानी आता है तो उसकी स्पीड बहुत ज्यादा होती है। उसमें बड़े-बड़े पत्थर बह कर आते हैं। वह रिवर बेड को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी तरह 2010 व 2019 में हेवी फ्लड आने से बैराज की सुरक्षा में लगाए गए बड़े-बड़े ब्लॉक बह गए थे। जिससे बैराज को नुकसान हुआ है।

देश के 5 राज्यों को पानी का बंटवारा करने वाला यह हथिनी कुंड बैराज अपनी सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग पर निर्भर है। सिंचाई विभाग ने अगर समय रहते इसकी सुरक्षा के लिए उपाय नहीं किए तो आने वाले समय में इससे भारी नुकसान हो सकता है। इसी को लेकर चिंतित विभागीय अधिकारी जल्द से जल्द इसकी सुरक्षा हेतु निर्माण कार्य शुरू करना चाहते हैं। इंतजार है सेंट्रल वाटर कमीशन द्वारा बनाए जाने वाले डिजाइन की रिपोर्ट आने का।

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अवैध माइनिंग बड़ा कारण

वैसे तो हथिनी कुंड बैराज के आसपास माइनिंग करने पर प्रतिबंध है। बैराज के 3 किलोमीटर ऊपर 3 किलोमीटर नीचे माइनिंग नहीं की जा सकती। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में माइनिंग माफिया ने बैराज के आसपास भारी माइनिंग की है। इस संबंध में कई मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिसके चलते माइनिंग माफिया का खेल वर्षों से जारी रहा।

क्या कहते हैं वन पर्यावरण मंत्री ?

हरियाणा के वन पर्यावरण एवं शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर का कहना है कि हरियाणा सरकार हथिनी कुंड बैराज की सुरक्षा के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। इसके लिए सेंट्रल वाटर कमीशन से डिजाइन तैयार होकर आना है। जैसे ही यह डिजाइन हमारे पास आ जाएगा, बैराज से साढ़े 550 मीटर नीचे एक समर्सिबल वेयर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बैराज देश के पांच बड़े राज्यों को पानी का बंटवारा करता है सरकार इसको लेकर काफी गंभीर है।

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