चिराग योजना के फॉर्म-6 के फेर में उलझे बच्चे, शिक्षा निदेशालय ने नाम किए गायब

Edited By Manisha rana, Updated: 24 Jan, 2026 10:55 AM

children entangled in form 6 of chirag yojana

चिराग योजना तहत बच्चों को दाखिला देने वाले स्कूलों को हर वर्ष शिक्षा निदेशालय द्वारा फॉर्म 6, मान्यता की कॉपी या अन्य किसी फेर में उलझा दिया जाता है जिसके चलते इस योजना तहत पढ़ रहे बच्चों का भुगतान राशि की सूची से नाम गायब कर दिया जाता है और इन...

चंडीगढ़ : चिराग योजना तहत बच्चों को दाखिला देने वाले स्कूलों को हर वर्ष शिक्षा निदेशालय द्वारा फॉर्म 6, मान्यता की कॉपी या अन्य किसी फेर में उलझा दिया जाता है जिसके चलते इस योजना तहत पढ़ रहे बच्चों का भुगतान राशि की सूची से नाम गायब कर दिया जाता है और इन बच्चों की प्रतिपूर्त राशि स्कूलों को नहीं मिल पाती। ये शिक्षा विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही है जिसको लेकर स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की है। इसके साथ ही हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने वंचित बच्चों के नाम सूची में शामिल कर पैसा जारी करने की शिक्षा निदेशक से मांग की है। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू फरीदपुरवाला हिसार, प्रांतीय संरक्षक तेलूराम रामायणवाला हांसी, प्रदेश महासचिव पवन राणा करनाल, अशोक कुमार रोहतक व रणधीर पूनिया फतेहाबाद ने कहा कि वर्तमान सत्र 2025-26 की कक्षा 5वीं से 8वीं तथा 9वीं से 12वीं की अप्रैल 2025 से सितम्बर 2025 तक 6 महीने की फीस प्रतिपूर्ति भुगतान के लिए शिक्षा निदेशालय द्वारा सूची जारी की गई जिसमें कई स्कूलों के एक भी बच्चे का नाम सूची में नहीं आया जबकि बच्चों के सभी डॉक्यूमैंट अपलोड किए हुए हैं और बच्चे इस स्कीम के तहत स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं लेकिन शिक्षा निदेशालय में पता करने पर किसी स्कूल को कहा गया कि आपके स्कूल का फार्म 6 फाइनल सबमिट नहीं है, किसी को कहा गया कि एस.एल.सी. पर मोहर नहीं लगी हुई और किसी को कहा गया कि आपके स्कूल की मान्यता की कॉपी नहीं लगी हई है।

कुंडू ने सवाल उठाया कि फॉर्म 6 केवल फीस बढ़ाने पर ही भरना आवश्यक है जो स्कूल फीस नहीं बढ़ाता उसके लिए फार्म 6 भरना जरूरी नहीं है। स्कूल की मान्यता शिक्षा निदेशालय ही जारी करता है तो स्कूल से बार बार मान्यता कॉपी मांगने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए जो कि पहले से ही विभाग के पास है और एस.एल.सी. पर मोहर नहीं है तो ये भी एम.आई.एस. पोर्टल से ऑनलाइन ही निकलती है जिसका कंट्रोल भी निदेशालय के पास ही होता है इसको चैक किया जा सकता है फिर भी अगर किसी स्कूल से दस्तावेज अपलोड करते समय कोई तकनीकी त्रुटि रह भी गई हो तो स्कूल को मेल, फोन या अन्य किसी माध्यम से सूचित करना चाहिए लेकिन त्रुटि सुधारने का कोई मौका नहीं दिया गया और स्कूलों को कोई पूर्व सूचना दिए बिना ही भुगतान राशि की सूची से गरीब परिवारों के बच्चों के नाम काट दिए गए। कुछ स्कूलों का तो शिक्षा निदेशालय की ऑब्जैक्शन लिस्ट में भी नाम नहीं है लेकिन उस स्कूल के भी इस योजना के तहत पढ़ रहे सभी बच्चों के नाम सूची से गायब कर दिए।

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