हरियाणा में इस गांव में लड़का नहीं लड़कियों के नाम से पहचाना जाता है घर, नेमप्लेट पर ग्रेजुएट बहू-बेटियों के नाम

Edited By Isha, Updated: 02 Mar, 2026 11:58 AM

in this village in haryana houses are identified by the names of girls not boy

हरियाणा के अंबाला जिले के खेड़ा गनी गांव में अनोखी पहल के तहत घरों पर पुरुषों की बजाय पढ़ी-लिखी बेटियों और बहुओं के नाम व उनकी डिग्रियां लिखी नेम प्लेट लगाई गई हैं। महिला ग्राम सभा से शुरू हुई इस

अंबाला: हरियाणा के अंबाला जिले के खेड़ा गनी गांव में अनोखी पहल के तहत घरों पर पुरुषों की बजाय पढ़ी-लिखी बेटियों और बहुओं के नाम व उनकी डिग्रियां लिखी नेम प्लेट लगाई गई हैं। महिला ग्राम सभा से शुरू हुई इस मुहिम में करीब 30 ग्रेजुएट महिलाओं को सम्मान मिला, जिससे लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा और समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश मिला।

कभी-कभी बदलाव न तो शोर मचाता है, न घोषणा करता है वह बस चुपचाप दीवारों पर लिख दिया जाता है। और जब दीवारें बोलने लगती है, तो समाज की खामोशी टूटने लगती है। ऐसी ही एक सधी हुई, लेकिन दूर तक सुनाई देने वाली दस्तक आई है-हरियाणा के अंबाला जिले के छोटे से गांव खेड़ा गनी से, जहां घरों की पहचान अब सिर्फ पुरुष मुखिया के नाम से नहीं, बल्कि पढ़ी-लिखी बेटियों और बहुओं से हो रही है। यह पहल किसी औपचारिक आदेश का परिणाम नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सोच का विस्तार है।

खेड़ा गनी की सुबहें अब कुछ अलग होती है। जैसे ही सूरज की पहली किरण गांव की गलियों में उतरती है, घरों के दरवाजों पर लगी स्टील की नेम प्लेट चमक उठती है। इन पर किसी खानदान का नाम नहीं, बल्कि बेटियों की मेहनत और पढ़ाई की पहचान दर्ज है। MA, MBA, MSc, BEd, BCom। हर प्लेट मानो कह रही हो कि यह गांव अपनी बेटियों पर गर्व करता है।

कैसे पड़ी इस पहल की नींव
इस पहल की नींव किसी सरकारी आदेश से नहीं, नवंबर 2025 में आयोजित एक महिला ग्राम सभा बैठक में पड़ी। बैठक में एचआईआरडी के निदेशक डॉ. वीरेंद्र चौहान मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। स्वास्थ्य विभाग, महिला पुलिस थाना, प्रोटेक्शन अधिकारी और महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला अधिकारियों ने महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानून, अधिकार, सामाजिक उत्थान और सोलर रूफटॉप सिस्टम जैसे विषयों पर जागरूक किया। गांव के सरपंच परवीन धीमान बताते हैं, चर्चा के दौरान एक विचार ने आकार लिया- गांव में कितनी बहू-बेटियां पढ़ी-लिखी है, क्यों न इसका सर्वे कराया जाए? न्यूनतम योग्यता ग्रैजुएशन तय की गई।

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