Edited By Manisha rana, Updated: 23 Jan, 2026 12:37 PM

करनाल में एक ऐसे कलाकार जिनकी कलाकारी को देख कर आप भी हैरान हो जाएंगे। जिनका नाम राजेंद्र वाधवा है, इन्होंने इतनी छोटी पतंग बना रखी है कि एक माचिस की डिब्बी में 1000 पतंग आ सकती है।
करनाल : करनाल में एक ऐसे कलाकार जिनकी कलाकारी को देख कर आप भी हैरान हो जाएंगे। जिनका नाम राजेंद्र वाधवा है, इन्होंने इतनी छोटी पतंग बना रखी है कि एक माचिस की डिब्बी में 1000 पतंग आ सकती है। पतंग इतनी छोटी की सुई की मोरी में से पतंग निकल जाए। इन्होंने 8 MM का छोटा सा चरखा भी बनाया है, साथ ही एक छोटा बैट बनाया है जिस पर चावल के दानों से टीम इंडिया के खिलाड़ियों का नाम है। बंद बोतल में चारपाई, ताजमहल, नाखून से छोटी हनुमान चालीसा, रामायण, शिव चालीसा, एक पोस्ट कार्ड पर 50 हजार बार मेरा भारत महान लिखा है। वो चाहते हैं कि उनकी इस कला को कोई पहचानें और वो अपने इन कारनामों को गिनीज बुक रिकॉर्ड में दर्ज करवाना चाहते हैं।
बचपन से ही कुछ अलग करने का शौक था- राजेंद्र वधवा
करनाल के रहने वाले राजेंद्र वधवा ने बताया कि बचपन से ही उन्हें कुछ अलग करने का शौक था, लेकिन इस बार उन्होंने एक ऐसी पतंग बनाई है जो सूई के सुराख में से आर-पार हो जाती है। सिर के बाल के साथ पतंग के कन्ने भी डले हुए हैं। पतंग की खास बात यह है अगर एक माचिस की डिब्बी में ऐसी हजार पतंगे आ सकती है। उन्होंने बताया इसके साथ-साथ सूक्ष्म लेखों से छोटी हनुमान चालीसा, रामायण और शिव चालीसा बनाया हुआ है, जो हाथ की सबसे छोटी उंगली के नाखून से छोटी होती है, उससे भी बारीक है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उन्हें कुछ अलग करने का शौक था इसलिए वह हमेशा कुछ अलग करते हैं।
बोतल के अंदर बनाया हुआ है ताजमहल
उन्होंने कहा कि हर आइटम बनाने में अलग-अलग समय लगता है। बोतल के अंदर ताजमहल बनाया हुआ है और बोतल के अंदर वो कुछ भी बना सकते हैं। महात्मा गांधी के साथ चरखा बना हुआ है, अर्जुन रथ भी बना हुआ है। गीता का उपदेश देते हुए राजेंद्र ने कहा कि इस बार गिनी बुक में रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए वह अपने हाथों से बनाई हुई अलग-अलग वस्तुओं को रिकार्ड दर्ज कराएंगे। जिसमें एक चरखा महात्मा गांधी का एक पतंग और सूक्ष्म लेख से जो रामायण लिखी हुई है, वो प्रस्तुत करेंगे।

हनुमान चालीसा को तैयार करने में लग गए थे पूरे 20 दिन
उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा को तैयार करने में उन्हें पूरे 20 दिन लग गए थे। कड़ी मेहनत के बाद वह इस तरह की वस्तुओं को तैयार करते हैं। पेंसिल से यह सब कुछ लिखा जाता है, कई बार आपका भी दर्द करने लग जाती है लेकिन हौसला इतना होता है कि सब कुछ आसानी से हो जाता है। उन्होंने कहा ये सब बनाने के लिए सिर का बाल, कागज, कलर पेपर, फेविकोल इस तरह की चीजों से ये सब कुछ तैयार किया है। उन्होंने कहा इस सबके लिए मुझे परिवार को भी समय देना पड़ता है और अपने शौक को भी मैं मार नहीं सकता, इसलिए लगातार कुछ अलग करने का प्रयास करता रहता हूं।
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