गुरुग्राम मेट्रो के लिए निजी जमीन सीधे खरीदेगी सरकार, मना करने पर होगा ये Action

Edited By Isha, Updated: 22 Jan, 2026 12:26 PM

government will directly purchase private land for the gurugram metro project

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एक नई पॉलिसी लागू की है। इस पॉलिसी के तहत अब गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) को आने वाले मेट्रो कॉरिडोर के लिए जरूरी प्राइवेट ज

डेस्क:  हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एक नई पॉलिसी लागू की है। इस पॉलिसी के तहत अब गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) को आने वाले मेट्रो कॉरिडोर के लिए जरूरी प्राइवेट जमीन सीधे बातचीत के जरिये खरीदने की अनुमति मिल गई है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई जमीन मालिक बेचने से इनकार करता है या तय प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता, तो जमीन को केंद्रीय कानून के तहत अनिवार्य रूप से अधिग्रहित किया जा सकता है।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने इस संबंध में 8 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी किया। यह पॉलिसी 29.05 किलोमीटर लंबे मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक बनने वाले मेट्रो कॉरिडोर पर लागू होगी। यह कॉरिडोर गुरुग्राम के कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का अहम हिस्सा है, जिसके तहत साल 2041 तक करीब 200 किलोमीटर का मेट्रो और मास ट्रांज़िट नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि मेट्रो लाइन का बड़ा हिस्सा सरकारी ज़मीन से होकर गुजरेगा, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कुछ ऐसे हिस्से हैं जहां निजी जमीन से बचना संभव नहीं है। इनमें मौजूदा इमारतों के पास बनने वाले वायडक्ट सेक्शन, कुछ संरचनाओं को हटाने की ज़रूरत और मेट्रो डिपो से जुड़ा एक छोटा लेकिन ज़रूरी निजी भू-भाग शामिल है। एक अधिकारी के अनुसार, इन जमीन के टुकड़ों को समय पर हासिल न किया गया तो पूरे मेट्रो प्रोजेक्ट की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कानूनी रूप से मजबूत जरूर है, लेकिन इसमें काफी समय लगता है। इसमें कई चरण होते हैं, जैसे नोटिफिकेशन जारी करना, सामाजिक प्रभाव आकलन, आपत्तियों की सुनवाई और कानूनी इंतजार, जिससे प्रक्रिया कई सालों तक खिंच जाती है।


इसी देरी से बचने के लिए हरियाणा सरकार ने ‘म्यूचुअल नेगोशिएशन के जरिये डायरेक्ट परचेज’ का मॉडल अपनाया है। इसके तहत जमीन मालिकों को 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले सामान्य मुआवजे से 25 प्रतिशत अधिक राशि दी जाएगी। इस बढ़ी हुई रकम में पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े लाभ भी शामिल माने जाएंगे।सरकार ने यह भी तय किया है कि जमीन का भुगतान सीधे जमीन मालिक के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के जरिये किया जाएगा। जमीन के रजिस्ट्रेशन पर किसी तरह की स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगेगी और पूरी लागत GMRL वहन करेगी।

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