विकास और वित्तीय अनुशासन की दिशा में मजबूती का संकेत देता होगा नायब सैनी सरकार का बजट

Edited By Isha, Updated: 01 Mar, 2026 07:42 PM

nayab saini government s budget will indicate a strong push towards development

हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार का प्रस्तावित बजट 2026–27 भारी वित्तीय दबाव, बढ़ते कर्ज और सीमित संसाधनों के बीच पेश होने जा रहा है। बजट से पहले सामने आए वित्त विभाग के आंतरिक

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी ):  हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार का प्रस्तावित बजट 2026–27 भारी वित्तीय दबाव, बढ़ते कर्ज और सीमित संसाधनों के बीच पेश होने जा रहा है। बजट से पहले सामने आए वित्त विभाग के आंतरिक आकलन और जनवरी 2026 तक की लेखा स्थिति यह संकेत दे रही है कि सरकार के सामने विकास से ज्यादा बड़ी चुनौती वित्तीय संतुलन बनाए रखने की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार कर्ज के सहारे बजट को संभालने की कोशिश कर रही है, जबकि आय के स्थायी स्रोत कमजोर होते जा रहे हैं।

 

राज्य की अर्थव्यवस्था के आंकड़े देखने पर तस्वीर उतनी मजबूत नहीं दिखती, जितनी सरकार पेश करने का प्रयास कर रही है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंत तक हरियाणा का सकल घरेलू उत्पाद लगभग तेरह लाख सड़सठ हजार करोड़ रुपये आंका गया है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सच है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में पिछले वर्षों की तुलना में स्थिरता नहीं दिख रही। औद्योगिक निवेश अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है और सेवा क्षेत्र की वृद्धि मुख्य रूप से शहरी इलाकों तक सीमित बताई जा रही है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के सरकारी दावों के बावजूद महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम आदमी पर इसका वास्तविक असर सीमित ही माना जा रहा है।

 

राज्य की सबसे बड़ी चिंता उसका लगातार बढ़ता कर्ज है। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा पर कुल कर्ज का बोझ तीन लाख पचास हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। यह राशि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग पच्चीस से सत्ताइस प्रतिशत बैठती है, जिसे वित्तीय विशेषज्ञ जोखिम की सीमा के करीब मान रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार विकास के नाम पर कर्ज ले रही है, लेकिन उससे होने वाला प्रतिफल स्पष्ट नजर नहीं आ रहा। ब्याज भुगतान का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन और सिमट सकते हैं।

 

राजस्व प्राप्तियों की स्थिति भी सरकार के लिए राहत देने वाली नहीं है। जनवरी 2026 तक राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियां वार्षिक अनुमान का लगभग पचहत्तर प्रतिशत ही हो पाई हैं। गैर-कर राजस्व और केंद्र से मिलने वाली सहायता अपेक्षा से काफी कम रही है। केंद्र से अनुदान की प्राप्ति जनवरी तक कुल अनुमान के करीब इकतीस प्रतिशत तक ही सिमट गई, जिससे राज्य सरकार की वित्तीय योजना पर सीधा असर पड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा हरियाणा को भुगतना पड़ रहा है।

 

खर्च के मोर्चे पर स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। जनवरी 2026 तक राजस्व व्यय एक लाख पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान का है। अकेले ब्याज भुगतान पर करीब उन्नीस हजार चार सौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि वेतन और पेंशन पर कुल मिलाकर इकतीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का स्थायी खर्च भविष्य में सरकार के हाथ बांध सकता है।

 

हालांकि सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ाने का दावा कर रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह खर्च भी बड़े पैमाने पर उधार के पैसे से किया जा रहा है। जनवरी 2026 तक पूंजीगत व्यय करीब सत्रह हजार करोड़ रुपये के आसपास पहुंचा है, लेकिन इसके समानांतर पूंजीगत प्राप्तियों में उधारी का हिस्सा अत्यधिक है। यानी सड़क, पुल और भवन तो बन रहे हैं, लेकिन उनकी कीमत आने वाले वर्षों में बढ़ते कर्ज और ब्याज के रूप में चुकानी पड़ेगी।

 

घाटे के आंकड़े भी सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े करते हैं। जनवरी 2026 तक राजस्व घाटा करीब नौ हजार एक सौ साठ करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जबकि पूरे वर्ष के लिए यह सत्ताइस हजार सात सौ करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वित्तीय घाटा भी जनवरी तक उनतीस हजार छह सौ करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा, तो अगले बजट में घाटा नियंत्रित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

 

सरकारी गारंटियों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। बिजली वितरण कंपनियों और अन्य संस्थाओं के लिए दी गई सरकारी गारंटी जनवरी 2026 तक छह हजार चार सौ सत्तर करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। यदि इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति और बिगड़ती है, तो यह बोझ सीधे राज्य सरकार के सिर आ सकता है।

 

कुल मिलाकर, नायब सैनी सरकार का बजट 2026–27 ऐसे समय में पेश होने जा रहा है, जब राज्य की अर्थव्यवस्था पर कर्ज, घाटे और बढ़ते अनिवार्य खर्च का दबाव साफ नजर आ रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह बजट विकास से ज्यादा नुकसान की भरपाई और वित्तीय संकट को छिपाने की कोशिश साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इन नकारात्मक संकेतों के बीच जनता और सदन को किस तरह भरोसे में ले पाती है। बजट 2026–27

 

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