Edited By Isha, Updated: 15 Jan, 2026 12:58 PM

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत गंभीर खतरे में है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं जिन फार्मासिस्टों को मरीजों तक सुरक्षित और सही तरीके से पहुंचानी चाहिए, उन्हीं के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।
कैथल: प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत गंभीर खतरे में है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं जिन फार्मासिस्टों को मरीजों तक सुरक्षित और सही तरीके से पहुंचानी चाहिए, उन्हीं के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।
प्रदेश में फार्मासिस्ट के कुल 1163 स्वीकृत पदों में से 568 पद रिक्त हैं। इसका नतीजा यह है कि कई अस्पतालों में दवा वितरण का कार्य प्रशिक्षु, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या स्टाफ नर्सों से कराया जा रहा है, जिन्हें न तो दवाओं के साल्ट की पूरी जानकारी होती है और न ही उनके विकल्प, डोज या संभावित साइड इफेक्ट की।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है। प्रदेश के करनाल, सिरसा, अंबाला जैसे बड़े जिलों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। पीएचसी और सीएचसी स्तर पर कई जगह बिना किसी पंजीकृत फार्मासिस्ट के ही दवाएं वितरित की जा रही हैं।