Edited By Yakeen Kumar, Updated: 28 Sep, 2025 09:31 PM

फिल्म की पृष्ठभूमि 1990 के दशक के ग्रामीण जीवन पर आधारित है। इसकी कहानी 12 वर्षीय सोनू नामक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है
हरियाणा डेस्क : रेवाड़ी की धरती से निकली शॉर्ट फिल्म ‘बकरी’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। 16 मिनट की यह फिल्म अहीरवाली भाषा में बनी है और इसका चयन यूरेशिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ है।
फिल्म की पृष्ठभूमि 1990 के दशक के ग्रामीण जीवन पर आधारित है। इसकी कहानी 12 वर्षीय सोनू नामक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लंबे समय से बीमार रहता है। वैद्य की सलाह पर उसके पिता बच्चे को बकरी का दूध पिलाना चाहते हैं, लेकिन जातिगत परंपराओं के चलते दादी शुरुआत में विरोध करती हैं। आखिरकार पोते की हालत बिगड़ने पर दादी रूढ़िवादी सोच छोड़कर उसे बकरी का दूध पिलाने के लिए राजी हो जाती हैं। बच्चा धीरे-धीरे ठीक होने लगता है और बकरी से गहरा लगाव महसूस करता है। जब बकरी को कसाई के पास बेच दिया जाता है तो बच्चा टूट जाता है। अंत में दादी सामाजिक सोच में बदलाव दिखाते हुए बकरी को वापस खरीदकर घर ले आती हैं।
फिल्म का निर्माण सुरेश यादव ने किया है, कहानी हरिओम कौशिक ने लिखी है, जबकि पटकथा और संवाद रोहित उर्फ आरजे भारद्वाज ने तैयार किए हैं। यही नहीं, उन्होंने फिल्म का निर्देशन भी किया है। दिविज कौशिक, बिमला आर्य और सुरेश बादव जैसे स्थानीय कलाकारों ने इसमें अभिनय किया है। बिना बड़े कलाकारों के सहारे बनी यह फिल्म सामाजिक समरसता और परंपराओं से ऊपर मानवीय संवेदनाओं का संदेश देती है।
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