Edited By Manisha rana, Updated: 10 Feb, 2026 08:18 PM

फरीदाबाद में हुए सूरजकुंड झूला हादसे के दो दिन बाद डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद का तबादला कर दिया गया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में एसपी के पद पर तैनात किया गया है।
फरीदाबाद (अनिल राठी) : फरीदाबाद में हुए सूरजकुंड झूला हादसे के दो दिन बाद डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद का तबादला कर दिया गया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में एसपी के पद पर तैनात किया गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका सूरजकुंड मेले में हुए हादसे से कोई संबंध नहीं है।
7 फरवरी को हुआ था हादसा
सूरजकुंड में आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में 7 फरवरी की शाम करीब 6 बजे बड़ा हादसा हो गया था। मेले में लगा ‘सुनामी झूला’ अचानक टूट गया, जिससे झूले पर सवार लोग नीचे गिर पड़े। इस हादसे में जगदीश प्रसाद नामक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई थी, जबकि 12 लोग घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण झूले की सॉफ्ट रॉड का टूटना बताया गया। उल्लेखनीय है कि यह मेला 31 जनवरी से शुरू हुआ था और 15 फरवरी तक चलना है।
एडीसी की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी में शामिल थे
हादसे के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मेले में लगे झूलों और अन्य उपकरणों की तकनीकी जांच, फिटनेस प्रमाणन और संचालन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए थे। इसके बाद एडीसी सतबीर मान की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
इस समिति में डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद, जेसी बोस वाईएमसीए यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से विशेषज्ञ अरविंद गुप्ता, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता हितेश कुमार और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता अश्वनी गौड़ को शामिल किया गया है। समिति मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं मकसूद अहमद
मकसूद अहमद वर्ष 2016 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए थे। वे मेव समुदाय से आने वाले पहले आईपीएस अधिकारी हैं। वे मेवात जिले के किशनगढ़ बास कस्बे के इस्माइलपुर गांव के निवासी हैं। उनके पिता शिफाद खान एक बैंक से मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मकसूद अहमद की पत्नी का नाम वाजिदा अहमद है।
उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई अलवर स्थित केंद्रीय विद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2005 में अलवर के आईईटी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने आईआईएमटी गाजियाबाद से एमबीए किया और लगभग पांच वर्षों तक निजी क्षेत्र में कार्य किया, जिसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में कदम रखा।
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