Edited By Manisha rana, Updated: 09 Feb, 2026 10:05 PM

साहा क्षेत्र के गांव पतरेहड़ी में आज भी इतिहास की जड़ें ज़िंदा हैं। यहां मौजूद है लगभग 400 साल पुराना बरगद का पेड़, जो गांववासियों के लिए सिर्फ एक पेड़ नहीं बल्कि उनके बुजुर्गों की याद और आशीर्वाद का प्रतीक है।
बराड़ा (अनिल कुमार) : साहा क्षेत्र के गांव पतरेहड़ी में आज भी इतिहास की जड़ें ज़िंदा हैं। यहां मौजूद है लगभग 400 साल पुराना बरगद का पेड़, जो गांववासियों के लिए सिर्फ एक पेड़ नहीं बल्कि उनके बुजुर्गों की याद और आशीर्वाद का प्रतीक है। कहते हैं, हर गांव में कोई न कोई ऐसा पेड़ जरूर होता है, जिसके नीचे सुबह-शाम बुजुर्गों की महफिल सजती है और उस पेड़ को गांव के बुजुर्ग जैसा सम्मान दिया जाता है। समय के साथ अक्सर पेड़ कमजोर हो जाते हैं और आंधी-तूफान में गिर जाते हैं, लेकिन पतरेहड़ी का यह बरगद आज भी पूरे शान से खड़ा है।
गांव वासियों के अनुसार यह बरगद उनके पूर्वजों के समय से मौजूद है। बचपन से लेकर आज तक उन्होंने अपने बड़ों को इसी पेड़ के नीचे बैठते, बातचीत करते और जीवन के अनुभव साझा करते देखा है। आज भी जब वे इस पेड़ के नीचे बैठते हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है मानो उनके बुजुर्ग आज भी उनके साथ मौजूद हों और उनका आशीर्वाद बना हुआ हो। वहीं अब सरकार पेड़ों के संरक्षण के लिए पेंशन भी दे रही है। यह बरगद सिर्फ छांव देने वाला पेड़ नहीं, बल्कि गांव की संस्कृति, परंपरा और भावनात्मक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
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