Edited By Manisha rana, Updated: 05 Apr, 2026 12:45 PM

हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज के प्रयासों से अम्बाला छावनी के शाहपुर में 'ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च संस्थान' (आई.डी.टी. आर.) और 'ऑटोमेटेड व्हीकल टैस्टिंग स्टेशन' (ए.टी.एस.) की स्थापना हेतु लगभग 11.49 करोड़ रुपए की राशि को प्रशासनिक स्वीकृति...
अम्बाला/चंडीगढ़ : हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज के प्रयासों से अम्बाला छावनी के शाहपुर में 'ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च संस्थान' (आई.डी.टी. आर.) और 'ऑटोमेटेड व्हीकल टैस्टिंग स्टेशन' (ए.टी.एस.) की स्थापना हेतु लगभग 11.49 करोड़ रुपए की राशि को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। विज ने बताया कि राशि स्वीकृत होने के बाद शाहपुर स्थित 13 एकड़ 5 कनाल 4 मरला भूमि पर' ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च संस्थान' और 'ऑटोमेटेड व्हीकल टैस्टिंग स्टेशन' की स्थापना का कार्य अब शीघ्र शुरू किया जाएगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि इन दोनों संस्थानों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से आसपास के जिलों के हजारों युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें और अधिक हुनरमंद तथा कौशलयुक्त बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ऑटोमेटेड व्हीकल टैस्टिंग स्टेशन की स्थापना से प्रति सप्ताह लगभग 300 वाहनों की फिटनैस जांच की जा सकेगी। विज ने कहा कि उनका उद्देश्य हरियाणा में परिवहन सुविधाओं को और अधिक सुचारु एवं सुगम बनाना है। इसी दिशा में तकनीकी रूप से आधुनिक सेवाओं को निरंतर लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
गौरतलब है कि ड्राइविंग ट्रैनिंग एवं रिसर्च संस्थान (आई.डी.टी.आर.) सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और आधुनिक ड्राइविंग कौशल सिखाने के लिए सरकार द्वारा स्थापित विशेष केंद्र हैं। इनकी मुख्य विशेषताओं में वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अत्याधुनिक सिमुलेटर, ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक तथा विभिन्न प्रकार के वाहनों (लाइट/हैवी) के लिए व्यापक पाठ्यक्रम शामिल हैं। ये संस्थान सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हैं। ऑटोमेटेड व्हीकल टैस्टिंग स्टेशन में गाड़ियों की फिटनैस जांच ऑटोमेटेड मशीनों के माध्यम से की जाती है। यहां फिटनैस टैस्टिंग के बाद जारी किया गया फिटनैस सर्टीफिकेट पूरे देश में वैध होता है। इस स्टेशन पर वाहनों की तकनीकी जांच के बाद सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में मदद मिलती है, क्योंकि जो वाहन अनफिट पाए जाते हैं, उन्हें सड़क पर चलाने के लिए फिटनैस सर्टीफिकेट जारी नहीं किया जाता। इन परीक्षणों में वाहनों के सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है।
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