हरियाणा में IAC छूट मांगने वाले डेवलपरों के खातों की खुलेगी जांच, आय-व्यय और मुनाफे का होगा स्वतंत्र आकलन

Edited By Krishan Rana, Updated: 21 Sep, 2026 09:14 PM

accounts of developers seeking iac exemptions in haryana will be scrutinized an

हरियाणा में लाइसेंसधारी कॉलोनियों और प्रोजेक्टों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर ऑग्मेंटेशन चार्ज (IAC) से छूट का दावा करने वाले

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा में लाइसेंसधारी कॉलोनियों और प्रोजेक्टों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर ऑग्मेंटेशन चार्ज (IAC) से छूट का दावा करने वाले डेवलपरों को अब अपने वित्तीय दावों का विस्तृत हिसाब देना पड़ सकता है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने ऐसे मामलों में वित्तीय स्थिति की स्वतंत्र जांच के लिए अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विभाग के पास यह जांच कराने का विकल्प होगा कि किसी प्रोजेक्ट के संबंध में डेवलपर की ओर से प्रस्तुत की गई आय, खर्च और मुनाफे की तस्वीर वास्तविक वित्तीय रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं। जरूरत पड़ने पर पैनल में शामिल सीए फर्म संबंधित लाइसेंसधारी के बुक्स ऑफ अकाउंट्स, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक लाभ की स्थिति का आकलन करेंगी। यह प्रक्रिया हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज रूल्स, 1976 के नियम 16ए (2) के तहत प्रस्तावित की जा रही है।

डेवलपर के दावे की होगी स्वतंत्र वित्तीय पड़ताल
आईएसी किसी लाइसेंसधारी कॉलोनी या प्रोजेक्ट के कारण बाहरी बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले अतिरिक्त विकास खर्च की भरपाई से जुड़ा शुल्क है। ऐसे में इससे छूट की मांग करने वाले डेवलपर को अपने वित्तीय आधार को प्रमाणित करना होगा।

विभाग अब जरूरत के अनुसार स्वतंत्र विशेषज्ञों से यह पड़ताल करा सकेगा कि प्रस्तुत किए गए आंकड़ों में दिखाई गई आय और व्यय वास्तविक हैं या नहीं। इसके साथ ही प्रोजेक्ट से अर्जित वास्तविक मुनाफे और वित्तीय स्थिति का भी परीक्षण किया जा सकेगा। इससे आईएसी छूट से जुड़े मामलों में केवल प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पेशेवर वित्तीय जांच को भी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकेगा।

20 साल से ज्यादा अनुभव वाली फर्मों को मौका
सीए फर्मों के चयन के लिए विभाग ने अनुभव और पेशेवर क्षमता से जुड़े कई मानदंड निर्धारित किए हैं। पैनल के लिए आवेदन करने वाली फर्म में कम से कम एक फेलो चार्टर्ड अकाउंटेंट (एफसीए) पार्टनर होना आवश्यक होगा। प्रोपराइटरशिप फर्म के मामले में प्रोपराइटर का चार्टर्ड अकाउंटेंट होना अनिवार्य रखा गया है।

फर्म के पास 20 वर्ष से अधिक का पेशेवर अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं के वैधानिक ऑडिट अथवा सीएजी से जुड़े सरकारी या अर्धसरकारी संस्थानों के ऑडिट का अनुभव भी जरूरी होगा।

तीन साल के टर्नओवर का देना होगा प्रमाण
पात्रता के लिए फर्म को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करने होंगे। वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के औसत सकल टर्नओवर का 45 लाख रुपये से अधिक होना आवश्यक रखा गया है।
इसके समर्थन में फर्मों को बैलेंस शीट, आय-व्यय विवरण और आयकर रिटर्न की प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी। विभाग इससे फर्म की वित्तीय क्षमता और उसके नियमित पेशेवर संचालन का आकलन कर सकेगा।

50 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाली संस्थाओं का अनुभव
पैनल में शामिल होने के लिए केवल सामान्य ऑडिट अनुभव पर्याप्त नहीं होगा। फर्म के पास पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान कम से कम तीन ऐसे बैंकों, सरकारी अथवा अर्धसरकारी संस्थानों के साथ काम करने का अनुभव होना चाहिए, जिनका टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से अधिक रहा हो। इस शर्त का उद्देश्य बड़े वित्तीय आकार वाली संस्थाओं के खातों और जटिल वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में अनुभवी फर्मों को प्रक्रिया में शामिल करना है।

प्रॉपर्टी और सरकारी नीतियों की जांच का अनुभव भी जरूरी
सीए फर्म के पास अचल संपत्तियों के उपयोग से संबंधित नियमों और सरकारी नीतियों के अनुपालन की जांच का अनुभव भी होना चाहिए। इसमें राज्य सरकार अथवा राज्य सार्वजनिक उपक्रमों की नीतियों के तहत निजी व्यक्तियों, संस्थाओं और उद्यमियों से संबंधित संपत्तियों के उपयोग की अनुपालना जांच शामिल है। इसके अलावा पिछले दस वर्षों में कम से कम दो राज्य सरकार के विभागों के साथ पेशेवर रूप से काम करने का अनुभव भी पात्रता शर्तों में रखा गया है।

हरियाणा, चंडीगढ़ या दिल्ली में होना चाहिए कार्यालय
पैनल के लिए आवेदन करने वाली फर्म का कार्यालय हरियाणा, चंडीगढ़ अथवा दिल्ली में होना आवश्यक होगा। विभाग ने इच्छुक फर्मों से निर्धारित शर्तों के अनुसार आवेदन आमंत्रित किए हैं। फर्मों को अपनी पेशेवर सेवाओं के लिए प्रस्तावित ऑडिट फीस की दर भी बतानी होगी। आवेदन सीलबंद लिफाफे में जमा कराने की प्रक्रिया रखी गई है।

पहले बनेगा पैनल, फिर जरूरत के अनुसार होगी जांच
विभाग पहले निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करने वाली सीए फर्मों का पैनल तैयार करेगा। इसके बाद आईएसी से छूट से जुड़े मामलों में आवश्यकता के अनुसार पैनल में शामिल फर्मों से वित्तीय जांच कराई जा सकेगी।
इस व्यवस्था के लागू होने पर आईएसी छूट के दावों में डेवलपर की ओर से प्रस्तुत वित्तीय जानकारी का स्वतंत्र पेशेवर परीक्षण संभव होगा। विभाग के सामने किसी प्रोजेक्ट की आय, खर्च और वास्तविक लाभ की स्थिति को अधिक स्पष्ट वित्तीय आधार पर परखने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

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