पुराने ट्रकों-बसों की विदाई शुरू, वाहन बदलने पर मिल रही 30% तक की भारी छूट... जानें क्या है इस फैसले की वजह

Edited By Isha, Updated: 19 Sep, 2026 08:13 PM

phasing out of old trucks and buses begins

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पुराने कमर्शियल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने की कवाय

चंडीगढ़( चंद्र शेखर धरणी): दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पुराने कमर्शियल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने की कवायद तेज कर दी गई है। केंद्र सरकार की ‘परिवर्तन योजना’ के तहत दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पुराने ट्रकों और बसों के स्थान पर नए और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार ने अब इस योजना के तहत लाभार्थियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को दो साल के बजाय एक साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य अगले सर्दियों के मौसम से पहले पुराने कमर्शियल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।

एक साल में 2.30 लाख ट्रक-बसों का पंजीकरण
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, योजना के तहत एक साल में करीब 2.30 लाख ट्रक और बसों का पंजीकरण कराने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में अक्टूबर के अंत तक 25 हजार वाहनों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उनका कहना है कि यदि योजना अपेक्षित गति से आगे बढ़ती है तो इसके प्रभाव अगले सर्दियों के मौसम में दिखाई देने लगेंगे।

बीएस-4 और पुराने वाहन होंगे दायरे में
परिवर्तन योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में परिवहन क्षेत्र से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करना है। इसके तहत बीएस-4 और उससे पुराने कमर्शियल ट्रकों एवं बसों को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार नई गाड़ी खरीदने वाले पात्र लाभार्थियों को वाहन की लागत पर लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक की वित्तीय राहत मिल सकती है। इस खर्च को केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के बीच साझा किए जाने की व्यवस्था है।

अब तक 1,357 वाहनों का पंजीकरण
परिवर्तन योजना के तहत अब तक 1,357 वाहनों को बदलने के लिए पंजीकृत किया जा चुका है। इनमें 1,094 ट्रक और 263 बसें शामिल हैं। राज्यवार आंकड़ों में दिल्ली सबसे आगे है, जहां 785 पंजीकरण हुए हैं। हरियाणा में 423, राजस्थान में 93 और उत्तर प्रदेश में 56 वाहनों का पंजीकरण किया गया है।
अब तक पंजीकृत वाहनों में 651 वाहन व्यक्तिगत मालिकों के हैं, जिससे व्यक्तिगत कमर्शियल वाहन मालिक योजना के प्रमुख लाभार्थी समूहों में शामिल हैं।

एक पोर्टल पर पूरी होगी प्रक्रिया
योजना के तहत एक सिंगल-पॉइंट डिजिटल पोर्टल विकसित किया गया है। इसे वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है, जहां सरकारी एजेंसियों के साथ वाहन निर्माता, डीलर, बैंक, तेल विपणन कंपनियां और गैस कंपनियां जुड़ी हैं।

पोर्टल को वाहन और स्क्रैपिंग से जुड़े डिजिटल डेटाबेस से भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पात्र लाभार्थी एक ही डिजिटल प्रक्रिया के जरिए अपनी पात्रता की जांच, पुराने वाहन की स्क्रैपिंग, नए वाहन के लिए वित्तीय व्यवस्था और इंसेंटिव का दावा करने जैसी प्रक्रियाएं पूरी कर सकेंगे।

यूपी और राजस्थान में जागरूकता अभियान पर जोर
सरकार ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान में योजना को लेकर जागरूकता और लोगों तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अभी तक पंजीकरण का बड़ा हिस्सा दिल्ली और हरियाणा से आया है। ऐसे में दूसरे एनसीआर राज्यों में भी योजना की जानकारी पहुंचाने और अधिक से अधिक वाहन मालिकों को इससे जोड़ने की तैयारी है।

सरकार का लक्ष्य सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने से पहले फ्लीट रिन्यूअल कार्यक्रम को गति देना है, ताकि पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों की संख्या घटाई जा सके।

दिल्ली के प्रदूषण पर नियंत्रण की कोशिश
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता की समस्या को देखते हुए कमर्शियल वाहनों के आधुनिकीकरण को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईक्यूएयर की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के अनुसार दिल्ली में वार्षिक औसत पीएम2.5 स्तर 99.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था। ऐसे में सरकार का फोकस परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने और पुराने वाहनों को तेजी से नए, कम प्रदूषण वाले वाहनों से बदलने पर है।

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