हरियाणा सरकार के साथ 590 करोड़ की धोखाधड़ी, IDFC फर्स्ट बैंक के 4 अधिकारी निलंबित

Edited By Manisha rana, Updated: 23 Feb, 2026 09:59 AM

590 crore fraud with haryana government

बैंकों में आम खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी के मामले तो अक्सर सामने आते हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे प्रदेश सरकार से जुड़ा है। हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करीब 590 करोड़ रुपए की बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।

चंडीगढ़ : बैंकों में आम खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी के मामले तो अक्सर सामने आते हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे प्रदेश सरकार से जुड़ा है। हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करीब 590 करोड़ रुपए की बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इस मामले में बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक और ए.यू. स्मॉल फाइनैंस बैंक में संचालित सभी सरकारी खातों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। दोनों बैंकों को ब्लैकलिस्ट करने का भी फैसला लिया गया है।

अकाऊंट बंद करने की प्रक्रिया में खुला फर्जीवाड़ा

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक सरकारी विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने के लिए अनुरोध किया। प्रक्रिया के दौरान खाते में दर्शाई गई राशि और विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस में भारी अंतर पाया गया। जांच में सामने आया कि करीब 590 करोड़ रुपए का अंतर है। बैंक की चंडीगढ़ शाखा के कुछ अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने की बात सामने आई। बैंक प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया और पुलिस को लिखित शिकायत सौंप दी है।

फॉरेंसिक ऑडिट और कानूनी कार्रवाई

बैंक ने पूरे मामले की गहन जांच के लिए बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट करवाने का निर्णय लिया है। बोर्ड स्तर पर विशेष कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब की गई है। धोखाधड़ी में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जिन खातों में राशि ट्रांसफर होने का संदेह है, वहां रिकॉल रिक्वेस्ट भेजकर खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

अब सिर्फ राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खुलेंगे खाते

घोटाले के बाद हरियाणा के वित्त विभाग ने सभी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त निकायों को निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही सरकारी खाते खोले जाएंगे। यदि किसी निजी बैंक में खाता खोलना आवश्यक हुआ तो वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। सभी प्रशासनिक सचिवों, उपायुक्तों, मंडलायुक्तों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों और सरकारी कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में निर्देश भेज दिए गए हैं।

31 मार्च तक खातों का मिलान अनिवार्य

सभी विभागों को 31 मार्च तक अपने बैंक खातों और सावधि जमाओं का मिलान कर 4 अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने यह भी माना है कि कई मामलों में बैंक स्पष्ट निर्देशों के बावजूद धनराशि को उच्च ब्याज वाली सावधि जमा में स्थानांतरित करने के बजाय बचत खातों में रोके हुए थे, जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ।

 

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