यहां कुदरती आफतों को वश में करने की रही है परंपरा, सैकड़ों वर्ष की आस्था का प्रतीक है हरियाणा का ये मंदिर

Edited By Isha, Updated: 22 Feb, 2026 09:11 PM

tradition of controlling natural disasters through spiritual practice

हरियाणा-पंजाब सीमा पर बसे शहर चीका का प्रसिद्ध शौरी मंदिर डेरा अपने भीतर सैंकड़ों वर्षों से आस्था, इतिहास और चमत्कारों की अनोखी गाथा समेटे हुए है। मान्यता है कि जब चीका नगर बसा, उसी समय नगर से दूर

गुहला चीका (कपिल): हरियाणा-पंजाब सीमा पर बसे शहर चीका का प्रसिद्ध शौरी मंदिर डेरा अपने भीतर सैंकड़ों वर्षों से आस्था, इतिहास और चमत्कारों की अनोखी गाथा समेटे हुए है। मान्यता है कि जब चीका नगर बसा, उसी समय नगर से दूर जंगल में प्रयाग पुरी नामक साधु तपस्या में लीन थे। बाद में उन्होंने यहां डेरे की स्थापना की और अपने शिष्य शौरी पुरी को इसकी जिम्मेदारी सौंपकर स्वयं समाधि ले ली। तभी से यह डेरा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

 वर्तमान सेवादार नागा साधु महंत राम पुरी के अनुसार, शौरी पुरी के बाद महंत अलखपुरी, महंत नैना पुरी और महंत पत्तासा पुरी सहित अन्य कई महंतों ने डेरे की गद्दी संभाली। इन महंतों ने कठोर तपस्या कर अनेक विद्याओं में पारंगतता हासिल की। बताया जाता है कि एक समय गुहला-चीका क्षेत्र में लगातार दो वर्षों तक प्राकृतिक आपदाओं ने कहर बरपाया। पहले भारी ओलावृष्टि से फसलें तबाह हो गईं और अगले वर्ष टिड्डी दल ने खेतों को चट कर दिया। परेशान किसानों ने महंत पत्तासा पुरी से प्रार्थना की। 

कहा जाता है कि महंत पत्तासा पुरी, जो दृष्टिहीन थे, उन्होंने अपनी साधना के बल पर ओलावृष्टि और टिड्डी दल को ‘बांध’ दिया और विश्वास दिलाया कि भविष्य में क्षेत्र की फसलें सुरक्षित रहेंगी। बुजुर्ग ग्रामीणों का दावा है कि तब से लेकर आज तक यहां ओलावृष्टि और टिड्डियों से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। महंत पत्तासा पुरी के बाद महंत मस्त पुरी, महंत इलायची पुरी और महंत फूल पुरी ने भी डेरे की परंपरा को आगे बढ़ाया और जनसेवा में योगदान दिया। शाम के समय डेरे का नजारा विशेष रूप से मनमोहक होता है। जैसे ही मंदिर में आरती के दौरान शंख और टाल बजते हैं, परिसर में रहने वाले कुत्ते भी एक सुर में स्वर मिलाने लगते हैं। 

श्रद्धालुओं का मानना है कि यह उनकी भक्ति और साधुओं के प्रति प्रेम का अनोखा प्रतीक है। चीका का शौरी मंदिर डेरा आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था का मजबूत स्तंभ बना हुआ है। सैकड़ों वर्षों से मंदिर में बनी समाधियों के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए लोगों द्वारा माथा टेक यहां मन्नतें मांगी जाती हैं ओर लोगों का विश्वास है कि बाबा का विशेष आशीर्वाद भी सबको मिलता है ओर मन्नतें भी पूरी होती हैं। गांव में कोई भी मन्नत पूरी होने पर लोग यहां माथा जरूर टेकते हैं ओर अपने सुख समृद्धि की कामना करते हुए अगली मन्नत मांगते हैं। 
 

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