बजट से केंद्र सरकार ने की आम जनमानस के हक-अधिकारों की कटौती: रणदीप सुरजेवाला

Edited By Manisha rana, Updated: 10 Feb, 2026 08:03 PM

central government has curtailed the rights of the common man through the budget

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा के सदस्य रणदीप सुर्जेवाला ने केंद्रीय बजट 2026-27 को केवल झुनझुना बताते हुए भाजपा सरकार पर जनहितैषी मुद्दों का कत्ल करने के आरोप लगाए हैं।

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा के सदस्य रणदीप सुर्जेवाला ने केंद्रीय बजट 2026-27 को केवल झुनझुना बताते हुए भाजपा सरकार पर जनहितैषी मुद्दों का कत्ल करने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भारी-भरकम शब्द, बड़बोली बातें, शेखचिल्ली के दावे और असलियत कुछ नहीं। शायद इसलिए शेयर बाजार से निवेशक तक, विदेशी निवेशकों से निजी निवेश तक, अर्थशास्त्रियों से लेकर समाजशास्त्रियों इत्यादि सभी ने बजट को मंबो-जंबो बजट बताया है यानि खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

राज्यसभा सदस्य ने कहा कि बजट का आकलन करें तो एक कड़वा और दर्दनाक सच साफ नजर आता है कि यह बजट गांव-गरीब, खेती-किसान और सामाजिक न्याय की हकमारी का बजट है। इसका दूसरा नाम है कटौती बजट क्योंकि इस बजट की मार्फत केंद्र सरकार ने गांव-गरीब, किसान के हकों की कटौती की है। सांसद सुर्जेवाला ने कहा कि कैपिटल एक्सपैंडिचर विकास का सबसे बड़ा पैमाना होता है और 2023-24 से लगातार इफैक्टिव कैपिटल एक्सपैंडिचर गिर रहा है। 2023-24 में जी.डी.पी. 4.2 प्रतिशत थी। 2024-25 में यह 4 प्रतिशत व साल 2025-26 में यह 3.9 प्रतिशत ही रह गई। 2025-26 में कैपिटल एक्सपैंडिचर 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपए कम हुआ है, जिसमें से 26 हजार करोड़ केंद्र सरकार और 1 लाख 19 हजार करोड़ राज्यों का है। ऐसे में कैपिटल एक्सपैंडिचर के बजट 2026-27 में जी.डी.पी. के 4.4 प्रतिशत का दावा विश्वास के काबिल नहीं है। 

जुमलों का फीका पकवान साबित हुआ बजट

राज्यसभा के पटल पर तथ्यों के साथ तस्वीर पेश करते हुए कांग्रेस नेता रणदीप सुर्जेवाला ने बजट को कृषि विरोधी बताते हुए कहा कि खेत-खलिहान के नजरिए से देखें तो एक लाइन में इसका सार है-ऊंची दुकान-केवल जुमलों के फीके पकवान। यानी भारी-भरकम न्यूज और टीवी हैडलाइन वाली घोषणाएं करेंगे और खूब प्रचार-प्रसार करेंगे लेकिन एक कौड़ी बजट अलॉट नहीं करेंगे। सुर्जेवाला ने कहा कि साल 2025-26 के बजट में वित्त मंत्री ने भारत को विश्व का अन्न कटोरा बनाने वाले किसान और कृषि क्षेत्र को पहला ईंजन बताया और बड़ी शान-शौकत से कई योजनाओं की घोषणा की है। कांग्रेस नेता ने आंकड़े बताते हुए कहा कि 2025-26 में कपास तकनीक मिशन के लिए 100 करोड़ की घोषणा हुई, लेकिन एक फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं हुई। ऐसे ही दलहन फसलों के तकनीकी मिशन के लिए 2025-26 के बजट में 1 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया लेकिन एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ।

ऐसे ही सब्जियों व फलों के तकनीकी मिशन के लिए 2025-26 में 500 करोड़ रुपए की घोषणा की गई लेकिन इस मिशन में भी कोई पैसा खर्च नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड बीज तकनीक मिशन के तहत भी 2025-26 में 100 करोड़ रुपए के बजट की घोषणा हुई लेकिन एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। ऐसे ही बिहार चुनाव को देखते हुए बजट में 2025-26 में मखाना बोर्ड के 100 करोड़ की घोषणा हुई लेकिन कोई पैसा खर्च नहीं हुआ। 1 फरवरी 2025 से लेकर 14 सितंबर 2025 तक यानी साढ़े 7 माह मखाना बोर्ड को भूल गए। फिर नवंबर 2025 में बिहार चुनाव था तो 15 सितंबर 2025 को पूर्णिया बिहार में मखाना बोर्ड का बड़ा जलसा कर करोड़ों रुपए खर्च किए गए। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुर्जेवाला ने कहा कि 2025-26 में नमो ड्रोन दीदी की बड़ी-बड़ी बातें हुईं। 676 करोड़ रुपए के बजट की घोषणा कर खूब तालियां पिटवाई गई मगर हकीकत ये है कि 676 करोड़ रुपए में से 576 करोड़ यानी 85 प्रतिशत पैसा दिया ही नहीं और पूरे देश में आधी आबादी यानी 65 करोड़ से अधिक महिलाओं में से केवल 500 ड्रोन ही नमो ड्रोन दीदी स्कीम में दिए गए हैं।

किसान विरोधी फैसलों से घाटे का सौदा बन रही है खेती

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुर्जेवाला ने कहा कि किसानों को फसलों पर एम.एस.पी. नहीं मिला। ऐसे ही कृषि और बागवानी फसलों की कीमतें गिरने पर किसान की कीमत भरपाई का बजट भी काटकर जीरो कर दिया गया। साल 2023-24 में 40 करोड़, 2024-25 में 23 करोड़, साल 2025-26 व 2026-27 में जीरो बजट का ही प्रावधान किया गया। खेती के बजट के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं लेकिन पिछले 6 सालों में 2018-19 से साल 2023-24 तक खेती के बजट से 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपए सरैंडर कर दिए गए। सुर्जेवाला ने कहा कि जो रहा-सहा बचा है, अब किसान की खाद की सब्सिडी भी काट दी। 2025-26 के रिवाइजड एस्टीमेट के मुकाबले इस बजट में कैमिकल और फॢटलाइजर्स के बजट में 15 हजार 777 करोड़ रुपए की कटौती कर दी गई। यूरिया की सब्सिडी में 9 हजार 670 करोड़ की कटौती की गई है। ग्रामीण भारत की हालत तो यह है कि सरकार का पैरॉडिक लेबर फोर्स सर्वे दिखाता है कि देश की 46 फीसदी आबादी खेती में लगी है मगर खेती का देश की ग्रॉस वैल्यू एडेड में हिस्सा मात्र 15 प्रतिशत ही है। वहीं महंगाई दर को एडजस्ट करने के बाद ग्रामीण मजदूरी में सालाना बढ़ौतरी की दर पिछले दस साल यानी 2014-15 से साल 2023-24 में 1 प्रतिशत से कम है। क्या मौजूदा बजट भयानक और दर्दनाक स्थिति को ठीक करने बारे और गरीब की आय बढ़ाने बारे कोई नीतिगत प्रावधान करता है, जिसका जवाब नहीं है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अब तो अमरीका के साथ व्यापार समझौते में किसानों और खेत मजदूरों व ग्रामीण हितों की बलि दे दी गई है। उनकी रोजी-रोटी पर नाकाबिले माफी हमला बोला गया है। समझौते की पहली बुलेट में ही साफ लिखा है कि अमरीका के खाद्य व कृषि उत्पादों के लिए देश का बाजार खोल दिया जाएगा। इनमें से प्रोसेस किया हुआ मक्का, ज्वार, सोयाबीन, सभी प्रकार के फल, बादाम, अखरोट, पिस्ता, नट्स, कपास शामिल हैं। इस साल भी कपास के भाव औंधे मुंह इसलिए गिरे, क्योंकि मोदी सरकार ने यू.एस.डी. 378 मिलियन की अमरीका की कपास जनवरी से नवंबर 2025 के बीच अमरीका से भारत में आयात की और हमारे किसानों को लूटा गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि इससे भी ज्यादा खतरनाक शब्द एडीशनल प्रोडैक्ट हैं क्योंकि सरकार नहीं बता रही है कि इसमें कौन-कौन सी और चीजें शामिल हैं, क्या दूध, पनीर, गेहूं और अन्य फसलें भी अब अमरीका से ही आएंगी। इस समझौता का छठा बुलेट तो खेती के लिए और भी खतरनाक है जिसमें कहा गया है कि अमरीका के खाद्य एवं कृषि उत्पादों के लिए भारत के नॉन टैरिफ बैरियर्स पर पुनर्विचार किया जाएगा। यानी किसान की थोड़ी-बहुत सब्सिडी जो बची है, उसे भी कम या खत्म किया जाएगा।

वंचित व शोषित वर्गों के हकों पर भी मारा जा रहा है डाका

राज्यसभा सदस्य रणदीप सुर्जेवाला ने कहा कि ऐसे ही वंचित और शोषित वर्गों के लिए खासतौर पर एस.सी.एस.टी, व ओ.बी.सी. के लिए भी पैटनर्स वही है। भारी-भरकम धरती धकेल बातें करों और बजट खर्च ही न करो। गरीब वर्गों के लिए सामाजिक अधिकारिता विभाग की हालत देखिए। साल 2022-23 में 11 हजार 922 करोड़ का बजट था, और सिर्फ 7 हजार 420 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 2023-24 में 12 हजार 847 करोड़ रुपए में से 9 हजार 510 करोड़ ही खर्च किए गए। ऐसे ही साल 2024-25 में 13 हजार करोड़ रुपए रखा गया और जनवरी 2025 तक केवल 451 करोड़ रुपए खर्च किए गए। कांग्रेस पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुर्जेवाला ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के लिए भी शोषण की यही स्थिति है। ओ.बी.सी. के नैशनल फैलोशिप का बजट साल 2025-26 में 190 करोड़ रुपए रखा गया लेकिन फिर 85 करोड़ रुपए काट दिए गए। ओ.बी.सी. छात्रों को विदेश पढऩे के लिए 60 करोड़ रुपए के सब्सिडी बजट की 2025-26 में घोषणा हुई, लेकिन दिए गए केवल 18 लाख रुपए। सुर्जेवाला ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इसलिए भाजपा सरकार के बारे में कहा जाता है कि ‘झूठ से, फरेब से यारी रखो, बस बड़बोले भाषण जारी रखो, बात मन की कहो या बजट की कहो, झूठ बोलो और आवाज भारी रखो। वो मुकम्मल हों ये जरूरी नहीं, बस योजनाएं ढेर सारी रखो।’

 

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