केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी का नाम हटाने के साथ ही गरीबों का छीन लिया निवाला : रणदीप सुरजेवाला

Edited By Manisha rana, Updated: 28 Jan, 2026 10:07 AM

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केंद्र की एन.डी.ए. सरकार ने कांग्रेस द्वारा लागू की गई मनरेगा योजना में नए कानून के तहत महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटाया बल्कि देश के करोड़ों गरीबों के मुंह से निवाला भी छीन लिया है।

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : केंद्र की एन.डी.ए. सरकार ने कांग्रेस द्वारा लागू की गई मनरेगा योजना में नए कानून के तहत महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटाया बल्कि देश के करोड़ों गरीबों के मुंह से निवाला भी छीन लिया है। ये बात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने कही। वे मंगलवार को बेंगलुरु में कांग्रेस द्वारा फ्रीडम पार्क में किए गए विशाल विरोध प्रदर्शन में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया व उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी मौजूद थे।

अपने संबोधन के दौरान पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुर्जेवाला ने बड़े ही आक्रामक अंदाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किए और मनरेगा की जगह बनाए गए वी.बी.जी.राम.जी. कानून की कड़े शब्दों में आलोचना की और कहा कि इस नए कानून ने गरीबों, मजदूरों और श्रमिकों के हक अधिकार पर डाका डाल दिया है। सांसद सुर्जेवाला ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी सरकार के दौरान मनरेगा को लागू करके गरीबों और देश के करोड़ों मजदूर परिवार को आजीविका कमाने का एक अधिकार दिया था और समूल पैसा केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता था मगर अब इस नए कानून ने इस गारंटी को ही खत्म कर दिया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मांगों को लेकर राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा।

महात्मा गांधी ने दी थी देश को एक नई दिशा

राज्यसभा सदस्य रणदीप सुर्जेवाला ने कहा कि महात्मा गांधी ने इस देश को नई दिशा दी थी। कांग्रेस की जब सरकार आई तो महात्मा गांधी के नाम से देश के मजदूर परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी योजना शुरू की। इस योजना में प्रावधान था कि योजना के अंतर्गत सारा पैसा केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को दिया जाता था क्योंकि वो युग महात्मा गांधी के देश का था मगर अब पिछले 11 सालों से एक ऐसी सरकार सत्ता पर काबिज है जो न केवल महात्मा गांधी के नाम से चिढ़ती है बल्कि देश के गरीबों और मजदूरों से भी कोई सरोकार नहीं है।

सुर्जेवाला ने कहा कि पहले इस योजना का प्रांतीय सरकारों पर कोई भार नहीं था मगर इस नए कानून ने राज्य सरकारों पर अतिरिक्त भार डाल कर योजना की प्रासंगिकता को ही खत्म कर डाली है। आज राज्य सरकारों के पास पैसा नहीं है क्योंकि किसी न किसी बहाने से केंद्र सरकार इन राज्यों से पैसा इक_ा करके अमीरों को देने पर आमादा है जबकि गरीब आदमी अपने हक अधिकार को लेकर जिदंगी के भंवर में उलझा हुआ है। सुर्जेवाला ने कहा कि रोजगार की गारंटी के अधिकार मनरेगा कानून को खत्म कर भाजपा सरकार ने 12 करोड़ से अधिक मजदूरों को रोजी रोटी का घाव दिया है। यह कानून करोड़ों मजदूरों के हकों पर डाका है और उनके अधिकारों पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार तथा आजीविका मिशन कानून सही मायनों में ‘मनरेगा’ कानून की दिनदहाड़े हत्या है।

केंद्र सरकार से सुर्जेवाला ने पूछे सवाल

बेंगलुरु में कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने संबोधन के जरिए कर्नाटक प्रभारी एवं सांसद रणदीप सुर्जेवाला ने मजदूरों के हितार्थ केंद्र सरकार से कई अहम सवाल भी पूछे हैं। सुर्जेवाला ने कहा कि वी.बी.ग्राम कानून कर्नाटक के 71 लाख सक्रिय मनरेगा श्रमिकों की आजीविका पर हमला है, जिनमें से 37 लाख महिलाएं हैं। इसके अलावा 13 लाख एस.सी हैं, 8 लाख एस.टी हैं, 40 लाख ओ.बी.सी हैं और 10 लाख सामान्य गरीब हैं। क्या कर्नाटक का भाजपा-जद(एस) नेतृत्व विशेष रूप से उनके एम.ओ और केंद्रीय मंत्री, जवाब देंगे कि उन्होंने मनरेगा को रद्द करने के लिए वोट क्यों दिया? उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार देने की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। मनरेगा कानून के तहत मनरेगा मजदूरी बजट का 100 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था जबकि इस नए कानून के तहत केंद्र सरकार सिर्फ 60 फीसदी बजट देगी और बाकी 40 फीसदी बजट राज्य सरकारों को देना होगा।

सुर्जेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उपकर में सालाना 5 लाख करोड़ रुपए लगाने से राज्यों के पास मुश्किल से ही कोई वित्त बचा है। इसका शुद्ध परिणाम श्रमिकों को रोजगार से वंचित करना होगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों से काम मांगने का अधिकार केंद्र सरकार ने छीन लिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा कानून मांग प्रेरित था। यदि कोई श्रमिक काम मांगता है तो उसे अनिवार्य रूप से देना होगा, चाहे वह श्रमिक देश के किसी भी गांव, तालुका या जिले में हो मगर नए कानून के तहत केंद्र सरकार तय करेगी कि किस राज्य में कितना काम देना है, राज्य के किस हिस्से में कितना काम देना है और कितने दिनों के लिए काम देना है. इसलिए सभी अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं और श्रमिकों द्वारा काम मांगने का अधिकार निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी है मगर इस लड़ाई में सभी को मिलकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी।

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