द्वारका एक्सप्रेसवे पर अधूरी प्लानिंग से परेशानी, अब यू-टर्न से राहत की उम्मीद

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 01 May, 2026 06:01 PM

incomplete planning on dwarka expressway causes problems now hope for relief fr

द्वारका एक्सप्रेसवे को आधुनिक और तेज रफ्तार संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किया गया है, लेकिन बिजवासन टोल जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर यू-टर्न की सुविधा न होना अब वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।

बादशाहपुर, ब्यूरो : द्वारका एक्सप्रेसवे को आधुनिक और तेज रफ्तार संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किया गया है, लेकिन बिजवासन टोल जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर यू-टर्न की सुविधा न होना अब वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। टोल पार करने के बाद विपरीत दिशा में जाने वाले वाहन चालकों के पास सुरक्षित यू-टर्न का विकल्प नहीं होने से कई लोग मजबूरी में गलत दिशा में वाहन चलाने लगते हैं। यह स्थिति न केवल ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को बढ़ावा देती है, बल्कि हादसों की आशंका भी बढ़ाती है।


अधूरी प्लानिंग से बढ़ी परेशानी :
द्वारका एक्सप्रेसवे को दिल्ली-गुरुग्राम की यातायात व्यवस्था को राहत देने वाली बड़ी परियोजना के रूप में देखा गया था। लेकिन महत्वपूर्ण स्थानों पर यू-टर्न, सर्विस रोड कनेक्टिविटी और सुरक्षित कट जैसी सुविधाओं की कमी अब सामने आने लगी है। बिजवासन टोल पर यू-टर्न न होना इसी अधूरी प्लानिंग का उदाहरण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वाहन चालक को सही दिशा में जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़े या विकल्प न मिले, तो वह गलत दिशा में चलने का जोखिम उठा लेता है।


नियम तोड़ना मजबूरी या लापरवाही :
आम तौर पर गलत दिशा में वाहन चलाना गंभीर ट्रैफिक उल्लंघन माना जाता है। पुलिस ऐसे वाहन चालकों पर चालान भी करती है, लेकिन इस मामले में सवाल यह है कि जब सड़क की संरचना ही चालक को सुविधाजनक विकल्प नहीं दे रही, तो जिम्मेदारी केवल वाहन चालक पर कैसे डाली जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार सड़क सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि बेहतर डिजाइन और व्यावहारिक यातायात व्यवस्था से भी सुनिश्चित होती है।


अब यू-टर्न से राहत की उम्मीद :
जीएमडीए की ओर से एनएचएआई से बिजवासन टोल पर यू-टर्न बनाने के लिए डीपीआर मांगी गई है। जमीन की उपलब्धता और तकनीकी पहलुओं का आकलन होने के बाद योजना आगे बढ़ सकती है। यदि यहां व्यवस्थित यू-टर्न बनता है, तो वाहन चालकों को सुरक्षित विकल्प मिलेगा और गलत दिशा में वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सकेगी।


सवाल अभी भी कायम :
बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण के दौरान ऐसे महत्वपूर्ण यातायात बिंदुओं का आकलन पहले क्यों नहीं किया गया। एक्सप्रेसवे केवल चौड़ी सड़क और टोल व्यवस्था का नाम नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी हर कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सुविधा भी उतनी ही जरूरी है। अब जरूरत है कि द्वारका एक्सप्रेसवे के अन्य संवेदनशील बिंदुओं का भी सर्वे कराया जाए, ताकि भविष्य में हादसों और जाम की समस्या से बचा जा सके।

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