अनंत अंबानी ने गुरुवायुर मंदिर का दौरा किया; 6 करोड़ का दान, राजराजेश्वरम पुनर्स्थापन के लिए 12 करोड़ की प्रतिबद्धता, देश भर में चर्चा का विषय

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 07 Apr, 2026 07:40 PM

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नंत अंबानी ने पवित्र गुरुवायुर मंदिर का दौरा कर भगवान गुरुवायुरप्पन के दर्शन किए और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

गुड़गांव ब्यूरो : अनंत अंबानी ने पवित्र गुरुवायुर मंदिर का दौरा कर भगवान गुरुवायुरप्पन के दर्शन किए और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर को ₹6 करोड़ का दान दिया तथा राजराजेश्वरम मंदिर के ऐतिहासिक पूर्व गोपुरम के पुनर्स्थापन हेतु अतिरिक्त ₹12 करोड़ देने का संकल्प लिया। मंदिर प्रशासन द्वारा अनंत अंबानी का पारंपरिक स्वागत किया गया, जिसमें देवस्वोम अध्यक्ष टी. पी. विनोद कुमार, कार्यकारी अधिकारी के. पी. विनयन, मुख्य पुजारी ई. पी. कुबेरन नंबूथिरी तथा देवस्वोम बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। धार्मिक अनुष्ठानों के तहत उन्होंने पोनुमकुडम, पट्टम, थाली, नेय्यमृतु जैसी पारंपरिक भेंट अर्पित कीं और पवित्र अश्वमेधा नमस्कारम भी किया, जो प्राचीन मंदिर परंपराओं के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।

 

मंदिर में योगदान के साथ-साथ अनंत अंबानी ने गुरुवायुर में हाथियों के कल्याण के लिए एक व्यापक पहल की भी घोषणा की। इस योजना में एक समर्पित हाथी अस्पताल, बिना जंजीर वाले आश्रय स्थल और आधुनिक, मानवीय देखभाल सुविधाओं का विकास शामिल है, ताकि मंदिर के हाथियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। यह पहल उनके वंतारा के माध्यम से चल रहे कार्यों के अनुरूप है।

 

इस अवसर पर उन्होंने कहा “भारत की आध्यात्मिक परंपराएँ केवल पूजा स्थल नहीं हैं, बल्कि जीवंत संस्थाएँ हैं जो आस्था, समुदाय, करुणा और प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को सुदृढ़ करती हैं। इस पवित्र विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित और सशक्त बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इन पहलों और वंतारा के माध्यम से हम विनम्रता के साथ सेवा करना चाहते हैं, भक्तों के अनुभव को बेहतर बनाते हुए और यह सुनिश्चित करते हुए कि हमारी परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रहे पशुओं की देखभाल गरिमा, करुणा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ की जाए। आस्था और सेवा की भावना पर आधारित ये योगदान एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिसका उद्देश्य मंदिर अवसंरचना को सुदृढ़ करना, विरासत स्थलों का संरक्षण करना, श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाना और मंदिरों से जुड़े पशुओं के कल्याण को बढ़ावा देना है।

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