Edited By Isha, Updated: 08 Apr, 2026 05:11 PM

बहुचर्चित 35 करोड़ रुपये के ऋण (लोन) घोटाले में आरोपितों को बड़ा झटका देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एफआइआर रद करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि रिकार्ड पर उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी के गंभी
चंडीगढ़ : बहुचर्चित 35 करोड़ रुपये के ऋण (लोन) घोटाले में आरोपितों को बड़ा झटका देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एफआइआर रद करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि रिकार्ड पर उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी के गंभीर तत्व सामने आते हैं. ऐसे में जांच को रोकना या उसमें हस्तक्षेप करना न्यायसंगत नहीं होगा।
जस्टिस मनीषा बत्रा की पीठ ने पी परमासिवम महालिंगम, शर्मिला आनंद और संतोष महालिंगम द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-3 थाने में दर्ज एफआइआर को रद करने और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग की थी।
शिकायतकर्ता कंपनी एमएसपीएम फिनकैप लिमिटेड ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने दो ट्रस्टों के माध्यम से मेडिकल और डेंटल कालेज के विस्तार के नाम पर करीब 35 करोड़ रुपये का लोन लिया। आरोप है कि लोन के लिए जिस जमीन को सुरक्षा (सिक्योरिटी) के रूप में दिखाया गया, उस पर पहले से ही अन्य वित्तीय समझौते और चार्ज मौजूद थे, जिन्हें जानबूझकर छिपाया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि लोन राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति करने की बजाय उसे अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया ।