मैटरनिटी सेंटर में कोहराम: ऑपरेशन के बाद तड़प-तड़प कर मरी महिला, कैबिनेट मंत्री और CMO तक पहुँचा मामला

Edited By Isha, Updated: 20 Mar, 2026 04:21 PM

woman dies in agony following surgery

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता का एक और मामला सामने आया है। बल्लभगढ़ के जगदीश कॉलोनी स्थित 'मिनी खेत्रपाल मैटरनिटी सेंटर' में डिलीवरी के बाद एक 31 वर्षीय महिला, नेहा

फरीदाबाद (पूजा): हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता का एक और मामला सामने आया है। बल्लभगढ़ के जगदीश कॉलोनी स्थित 'मिनी खेत्रपाल मैटरनिटी सेंटर' में डिलीवरी के बाद एक 31 वर्षीय महिला, नेहा, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कैबिनेट मंत्री और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को ज्ञापन सौंपा है।

परिजनों के अनुसार, नेहा को 17 मार्च की दोपहर नॉर्मल डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव में देरी होने पर डॉक्टर ने ऑपरेशन (C-Section) की सलाह दी। ऑपरेशन के बाद नेहा ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन बच्ची की हालत नाजुक होने के कारण उसे दूसरे अस्पताल के NICU में रेफर कर दिया गया।

 परिजनों का दावा है कि रात के समय अस्पताल में कोई भी सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। नेहा को रात में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद वहां मौजूद स्टाफ (जगवती) ने उसे एक इंजेक्शन लगाया। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही नेहा के मुँह से झाग आने लगा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। आरोप है कि घटना के करीब आधे घंटे बाद डॉक्टर अस्पताल पहुँचे।

 
बेटी को खोने के बाद न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने स्थानीय कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल अपनी मनमानी कर रहे हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। परिजनों ने CMO को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह का प्रभाव न डाला जाए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए। सिविल सर्जन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की एक जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं।

 
वर्तमान में पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर बीके अस्पताल (BK Hospital) के शवगृह में रखवा दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद और मेडिकल बोर्ड की जांच के आधार पर संबंधित अस्पताल और स्टाफ के खिलाफ कानूनी कार्यवाही (जैसे धारा 304A के तहत मामला) की जाएगी।

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