बौद्ध की सूझबूझ व उनके अनुभव ने भी सरकारी तंत्र की कूटनीति को फेल करने में दिया योगदान : कृष्ण भारद्वाज

Edited By Krishan Rana, Updated: 17 Mar, 2026 07:20 PM

the wisdom and experience of the buddhists also contributed to the failure of th

हरियाणा के राजनीतिक लंबे इतिहास को बदलते हुए इस बार कांग्रेस के एक प्रत्याशी ने राज्यसभा चुनाव में जीत

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा के राजनीतिक लंबे इतिहास को बदलते हुए इस बार कांग्रेस के एक प्रत्याशी ने राज्यसभा चुनाव में जीत की पताका फहराते हुए एक कीर्तिमान स्थापित किया है। बेशक कांग्रेस के पास इस जीत के लिए विधायकों की गिनती पूरी थी, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी पुराने इतिहास रचने का डर सबके चेहरों पर था। हरियाणा की राजनीति पूरी तरह से गरमाई हुई थी। क्योंकि पिछली बार की तरह इस बार भी कोई खेला हो सकता था।  इस बार भी कांग्रेसी प्रत्याशी को हराने की जीतोड़ कोशिशें अवश्य हुई होंगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी की सजगता, प्रत्याशी की सूझबूझ और अनुभवी जीवन ने सरकारी तंत्र की कूटनीति को इस बार फेल कर दिया। 

आपको बता दे कि कर्मवीर बौद्ध कोई साधारण नेता या व्यक्ति नहीं बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक सिस्टम को समझने वाले एक बेहतरीन कूटनीतिज्ञ है। अपने जीवन काल का एक लंबा सफर इन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच और मंत्रियों की सेवाओं में बिताया है। कर्मवीर बौद्ध एक कुशल, कर्तव्यनिष्ट और सूझबूझ वाले अधिकारी रहे हैं। हरियाणा सचिवालय में इन्होंने विभिन्न मंत्रियों के साथ विभिन्न पदों पर नौकरी कर राजनीति को बहुत नजदीक से देखा, समझा और जाना है। लेकिन सरकारी सेवाओं के साथ-साथ हमेशा से इनका इंटरस्ट राजनीति में रहा। 


बौद्ध के सौम्य स्वभाव से मंत्री व अधिकारी भी थे प्रभावित :भारद्वाज  

हरियाणा में बहुत सी सरकारे बनी और बदली। बहुत से मुख्यमंत्री बने, हटे सरकारें बनी गिरी, राजनीतिक पार्टियां मजबूत हुई और खत्म हुई यह सब कर्मवीर बौद्ध ने नजदीक से देखा और उनकी कमजोरियां, कमियों को समझा है। कर्मवीर बौद्ध ने अपनी लंबी सेवाएं प्रदेश को दी। इस दौरान के सभी मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों में से शायद एक भी ऐसा ना हो जो कर्मवीर से चिर परिचित और उनके सौम्य स्वभाव से प्रभावित ना रहा हो।

इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर उनके एक परम मित्र और लगभग उनके सामान्य जीवन वाले कृष्ण भारद्वाज से विशेष चर्चा हुई। अगर इन दोनों के बारे में चर्चा करें तो जन्म से लेकर नौकरी और नौकरी से लेकर राजनीतिक सफर और अनुभव लगभग एक सा है। दोनों की ही मातृभूमि रोहतक, एक जैसी उम्र और लगभग एक साथ सेक्टरेट में नौकरी की जॉइनिंग हुई। कर्मवीर बौद्ध दलित समाज के प्रति पूर्ण समर्पित है और कृष्ण भारद्वाज ब्राह्मण समाज के कल्याण हेतु एक संगठन का संचालन करते हैं। कई ब्रांचो में एक साथ नौकरी करने के कारण दोनों की घनिष्ठता का कोई जवाब नहीं। दोनों ही अच्छे -सच्चे और प्यारे मित्र हैं। दोनों की मेहनत और लगन के कायल इनके मंत्री खूब रहे हैं।

बौद्ध काफी मेहनती व कर्मशील व्यक्ति हैं : भारद्वाज

 कृष्ण भारद्वाज बताते हैं कि हाल ही में जब प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज थे तो वह दोनों होम ब्रांच में कार्यरत थे। कर्मवीर बौद्ध काफी मेहनती व कर्मशील व्यक्ति हैं। जिनकी राजनीतिक समझ काफी ज्यादा है। उन्होंने राहुल गांधी व कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे का धन्यवाद करते हुए उनके फैसले को दूरदर्शी सोच का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कर्मवीर बौद्ध जैसे हीरे व्यक्ति को इस सम्मान के साथ नवाजना एक संदेश है कि कांग्रेस पार्टी एक आम साधारण व्यक्ति के हितों का ध्यान रखती है। कांग्रेस पार्टी आम आदमी को आगे लाना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल कांग्रेस की ही नहीं बल्कि हर कर्मशील आम व्यक्ति की है।

कर्मवीर बौद्ध का जीवन जनसाधारण को समर्पित रहा: भारद्वाज

 कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि कर्मवीर बौद्ध उनके संघर्ष के साथी रहे हैं। एक साथ नौकरी करते हुए दोनों ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण सफर एक साथ तय किया है। बता दे कृष्ण भारद्वाज भी एक आम व्यक्ति नहीं बल्कि वह हरियाणा की तत्कालीन सरकारों में 10 तेज तर्रार और अपनी कूटनीति से बड़े बड़ों को धूल चटा देने वाले मंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं। राव बंसीलाल, रमेश कौशिक, गोपाल कांडा, रणदीप सुरजेवाला, रामविलास शर्मा, चौधरी चांदराम और मौजूदा कैबिनेट मंत्री अनिल विज के साथ उनका दिली रिश्ता रहा है। अगर कहें कि चौधरी अभय सिंह चौटाला, चौधरी चांदराम, चौधरी चंद्र मोहन और चौधरी कुलदीप बिश्नोई के साथ उनकी  घनिष्ठता है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं। 

कर्मवीर बौद्ध के साथ कृष्ण भारद्वाज का यह चित्र आपको उनकी नजदीकियों का एहसास अवश्य करवा रहा होगा। एक साथ ट्रैक्टर पर बैठकर सुंदर मुस्कुराहट के साथ यह चित्र स्वयं बयां कर रहा है कि स्थितियां चाहे संघर्ष की रही, चाहे सरकारी सेवाओं के दौरान की रही या आज कर्मवीर बौद्ध सफलता की एक बड़ी सीढ़ी पर खड़े हैं लेकिन इनकी दोस्ती में कभी कोई फर्क नहीं रहा। यह जय और वीरू जैसी जोड़ी उनकी तरह ही गहरी और निस्वार्थ भाव वाली है। कर्मवीर बौद्ध होम विभाग में ब्रांच सुपरिंटेंडेंट थे और कृष्ण भारद्वाज महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सेक्रेटरी की निभा रहे थे। बड़े-बड़े अधिकारी भी किसी मुश्किल काम में उलझते थे तो कई बार कर्मवीर बौद्ध और कृष्ण भारद्वाज से सलाह मशवरा लिया करते थे। अब कर्मवीर बौद्ध महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं, एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर आई है। कांग्रेस पार्टी को उनकी जीत का एक बड़ा फायदा होने का एक बड़ा अनुमान है। 

कर्मवीर बौद्ध की जीत कांग्रेस को पहुंचा सकती है बड़ा फायदा

वह एक बड़ा दलित चेहरा है प्रदेश में एक बड़ी उनकी पहचान है और उनसे जुड़े प्रदेश के कोने कोने में महत्वपूर्ण व्यक्तियों में एक बड़ी खुशी की लहर है। यह तय माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के फैसले से कांग्रेस को दलित वोटो का एक बड़ा फायदा होना लगभग तय है। इसके साथ-साथ उनकी कोर टीम यानि उनके खास साथी मित्र अब उनके साथ कंधे से कंधा मिले खड़े नजर आ रहे हैं। आने वाले समय में हमारे अनुमान अनुसार कृष्ण भारद्वाज का राजनीतिक सफर कांग्रेस के साथ तय होगा और माना जा रहा है कि लंबी प्रशासनिक सेवाओं के बाद अब एक साथ यह दोनों योद्धा राजनीतिक सफर करते हुए प्रदेश की सेवा करने की तैयारी लगभग फाइनल कर चुके हैं। 

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