राज्यसभा चुनाव का हाई-वोल्टेज ड्रामा: 83 वोट, 5 कैंसल और एक ऐतिहासिक जीत; समझिए कैसे फेल हुई निर्दलीय की रणनीति

Edited By Isha, Updated: 17 Mar, 2026 08:35 AM

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हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज की। कुल 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 2 विधायकों ने वोट नहीं डाला। कांग्रेस के 4 और भाजपा का 1 वोट रद्द हो गया, जिसके चलते 83...

डेस्क: हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज की। कुल 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के 2 विधायकों ने वोट नहीं डाला। कांग्रेस के 4 और भाजपा का 1 वोट रद्द हो गया, जिसके चलते 83 वोट मान्य थे।


ऐसे जीती Congress और BJP
कुल 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से 2 ने वोट नहीं डाला और 5 वोट रद्द हो गए। इस प्रकार, कुल 83 वोट बचे। भाजपा के 48 विधायकों में से 1 का वोट रद्द हो गया, जिससे 47 वोट बचे। पहली प्राथमिकता वाले वोट भाटिया को 39 और नांदल को 8 मिले। कांग्रेस के 37 विधायकों में से 4 वोट रद्द हो गए और 5 ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे 28 वोट बचे। इससे कर्मवीर बौद्ध की जीत तय हो गई।

भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को पहली प्राथमिकता के 16 वोट मिले, जिनमें भाजपा के 8, कांग्रेस के 5 और निर्दलीय के 3 वोट शामिल हैं। 83 वैध वोट पड़े हैं। वोट वैल्यू का फार्मूला है कि कुल वैध वोट को (सीटों की संख्या + 1) से भाग दें। फिर जो संख्या आए उसमें 1 जोड़ दें। यही जीत का आंकड़ा (कोटा) होता है। इसके हिसाब (वैध वोट 83/2+1=27.66) से भाजपा के संजय की पहली प्राथमिकता वाले 27.66 वोट से जीत हुई। पहली प्राथमिकता के बचे 11.34 वोट दूसरी प्राथमिकता वाले प्रत्याशी को शिफ्ट हुए। यानी नांदल को 27.34 वोट मिले, और वे भाजपा का एक वोट रद्द होने के कारण कांग्रेस के बौद्ध (28 वोट) से 0.66 वोट से पीछे रह गए। यदि इनेलो ने राज्यसभा चुनाव से दूरी न बनाई होती तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। कांग्रेस की जीत .33 वोट वैल्यू यानी एक से भी कम वोट के अंतर से हुई। इनेलो निर्दलीय नांदल को वोट देती तो उनकी जीत तय थी।

भाजपा की एक वोट रद्द होने से कैसे गड़बड़ हो गई?
यदि भाजपा का एक वोट रद्द न हुआ होता, तब भी नतीजे बदल जाते। क्योंकि उस स्थिति में सतीश नांदल के पास कांग्रेस से अधिक वोट वैल्यू होती। वोट सीक्रेसी को लेकर कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल के वोट की शिकायत हुई थी। हालांकि जांच में वह वोट वैलिड निकला। अगर यह वोट रद्द हो जाता तो कांग्रेस ये चुनाव हार सकती थी।

9 वोट गंवाने के बावजूद कांग्रेस कैसी जीत गई?
 इनेलो के 2 वोट न डलने और 5 वोट रद्द होने से कुल 83 वोटों की गिनती हुई। ऐसे में जीत का कोटा 27.66 वोट रह गया। इसलिए कांग्रेस 5 क्रॉस वोट और 4 वोट रद्द होने के बाद भी जीत गई। क्योंकि उसके पास 28 वोट बच गई।

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