कर्मवीर बौद्ध ने जीतते ही दीपेंद्र हुडडा ने डाली पंजाबी स्टाइल की झप्पी, बोले- पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का दिल से आभार

Edited By Isha, Updated: 17 Mar, 2026 08:18 AM

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हरियाणा कांग्रेस के राज्यसभा चुनाव जीतने वाले कर्मवीर बौद्ध ने जीत के बाद कहा है कि  *मेरे जैसे एक साधारण से कार्यकर्ता को राज्यसभा तक पहुँचाने और इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी*:     हरियाणा कांग्रेस के राज्यसभा चुनाव जीतने वाले कर्मवीर बौद्ध ने जीत के बाद कहा है कि  *मेरे जैसे एक साधारण से कार्यकर्ता को राज्यसभा तक पहुँचाने और इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का दिल से आभार प्रकट करता हूँ..!* कर्मवीर ने कहा कि यह मेरे लिए सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है!मैं विश्वास दिलाता हूँ कि इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाते हुए समाज के हक-अधिकारों की आवाज़ को मजबूती से उठाऊँगा और संविधान की रक्षा के लिए हमेशा संघर्ष करता रहूँगा..!*

राज्यसभा हरियाणा के चुनाव परिणाम घोषित होते ही कर्मवीर को सबसे पहले हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा ने जहां बधाई दी,भी हरियाणा विधानसभा में शुरू से अंत तक मौजूद सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पंजाबी स्टाइल में झप्पी डाल मुबारिक बाद दी।राव नरेंद्र सिंह ने कहा है कि कर्मवीर बौद्ध की जीत देश व प्रदेश कांग्रेस की एक साधारण कार्यकर्ता पर भरोसे की जीत है।देश में कांग्रेस के दिग्गज नेता व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हरियाणा मैम सडयंत्र,धनबल हार गया है और सच्चाई की जीत,कर्म वीर सिंह मुबारक हो।

कौन है कर्मवीर बौद्ध:
हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव हमेशा केवल संसदीय प्रतिनिधित्व का मामला नहीं होते, बल्कि यह प्रदेश की राजनीतिक रणनीति, सामाजिक संतुलन और दलगत शक्ति-प्रदर्शन का भी संकेत होते हैं। वर्ष 2026 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा कर्मवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाना और उनका चुनाव जीतना भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक साधारण प्रशासनिक अधिकारी से लेकर संसद के उच्च सदन तक का उनका सफर हरियाणा की बदलती सामाजिक-राजनीतिक संरचना को भी दर्शाता है।

प्रशासनिक पृष्ठभूमि से राजनीति तक
कर्मवीर सिंह बौद्ध  अनुसूचित जाति समाज से आते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सरकारी सेवा से की और लंबे समय तक हरियाणा सरकार के सचिवालय में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वे हरियाणा सिविल सचिवालय में सुपरिंटेंडेंट के पद पर रहे तथा कई विभागों में प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने गृह विभाग में अंडर सेक्रेटरी के रूप में भी जिम्मेदारियां निभाईं। सरकारी फाइलों के निस्तारण, विभागीय समन्वय और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया को समझने का उन्हें व्यापक अनुभव रहा। यही कारण है कि उन्हें प्रशासनिक कार्यशैली और शासन व्यवस्था की गहरी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है।
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विधानसभा सचिवालय का अनुभव
सरकारी सेवा के दौरान उनका सबसे महत्वपूर्ण अनुभव हरियाणा विधानसभा सचिवालय से जुड़ा रहा। यहां उन्होंने सचिवालय में महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व निभाए और सदन की कार्यवाही, प्रश्नकाल, विधायी समितियों और संसदीय प्रक्रियाओं से जुड़े कामों को करीब से देखा।
इस अनुभव ने उन्हें संसदीय प्रणाली की गहरी समझ प्रदान की, जो आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन में उपयोगी साबित हुई। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा और सचिवालय की प्रक्रियाओं की जानकारी उन्हें राज्यसभा में भी प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करेगी।

सामाजिक सरोकार और जनसंपर्क
सरकारी सेवा के साथ-साथ कर्मवीर बौद्ध सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। विशेष रूप से अनुसूचित जाति और कमजोर वर्गों के मुद्दों को लेकर वे कई मंचों पर सक्रिय रहे। सामाजिक न्याय, शिक्षा और समान अवसर जैसे विषय उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख मुद्दे रहे हैं।
उनकी सादगीपूर्ण जीवन शैली और प्रशासनिक पृष्ठभूमि ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की छवि दी जो बिना अधिक राजनीतिक शोर-शराबे के समाज के मुद्दों पर काम करने वाला कार्यकर्ता रहा है।

कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो कांग्रेस द्वारा कर्मवीर बौद्ध को राज्यसभा उम्मीदवार बनाना केवल एक नाम तय करना नहीं था, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति भी माना जा रहा है। हरियाणा में दलित समाज का बड़ा जनाधार है और कांग्रेस लंबे समय से इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती रही है।
ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे बढ़ाने का फैसला किया जिसकी पृष्ठभूमि प्रशासनिक होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हो। इस दृष्टि से कर्मवीर बौद्ध का चयन कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक सोच का हिस्सा माना गया।

राज्यसभा तक का सफर
राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत ने यह संकेत दिया कि कांग्रेस संगठन अपने साधारण पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अनुभव वाले व्यक्तियों को भी संसद तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। यह संदेश पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे का सफर
कुल मिलाकर कर्मवीर सिंह बौद्ध का सफर हरियाणा की राजनीति में एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करता है। एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सचिवालय में काम करने से लेकर सामाजिक सरोकारों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होना और अंततः राज्यसभा तक पहुंचना उनके बहुआयामी अनुभव को दर्शाता है।
राजनीतिक दृष्टि से यह भी देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासनिक पृष्ठभूमि से आए यह नेता संसद के उच्च सदन में हरियाणा के सामाजिक और विकास संबंधी मुद्दों को किस तरह उठाते हैं और कांग्रेस की रणनीतिक राजनीति में उनकी भूमिका आगे किस रूप में विकसित होती है।

 
 

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