सिरसा : शहीद सुखचैन सिंह के घर पहुंचे सीएम सैनी, परिजनों को बंधाया ढांढस; बोले- हरियाणा सरकार परिवार के साथ खड़ी है

Edited By Harman, Updated: 12 Sep, 2026 12:09 PM

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हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ पहुंचकर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद लांस नायक सुखचैन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सिरसा (सतनाम सिंह) : हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ पहुंचकर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद लांस नायक सुखचैन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री सीधे शहीद के निवास स्थान पहुंचे, जहां उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया और गहरी सांत्वना व्यक्त की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शहीद का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और हरियाणा सरकार दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।

 जम्मू-कश्मीर के राजौरी में बीते 3 सितंबर लांस नायक सुखचैन सिंह देश के लिए शहीद हो गए थे। शहीद सुखचैन सिंह की शहादत के बाद से ही उनके पैतृक गांव कुत्ताबाढ़ और पूरे सिरसा जिले में शोक की लहर दौड़ गई थी। इसी कड़ी में आज हरियाणा के मुख्यमंत्री शहीद के गृह गांव कुत्ताबाढ़ पहुंचे। मुख्यमंत्री ने शहीद लांस नायक सुखचैन सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने शहीद के माता , पत्नी और अन्य परिजनों के हाथ थामकर उन्हें सांत्वना दी और कहा कि लांस नायक सुखचैन सिंह की वीरता और देशभक्ति पर न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश को गर्व है।

मुख्यमंत्री के इस दौरे के दौरान गांव वासियों और ग्राम पंचायत ने भी अपनी भावनाएं उनके समक्ष रखीं। शहीद के अंतिम सम्मान और उनके परिवार के सुरक्षित भविष्य को लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें गांव के विकास और शहीद की याद को अमर बनाने के लिए प्रमुख मांगें शामिल थीं। गांव के सरपंच बयंत सिंह ने मुख्यमंत्री के सामने ग्रामीणों और शहीद परिवार की मांगों को प्रमुखता से उठाया। पंचायत की ओर से रखी गई मुख्य मांगों में शामिल हैं। 

शहीद लांस नायक सुखचैन सिंह के परिवार के एक योग्य सदस्य को राज्य सरकार की ओर से तुरंत पक्की सरकारी नौकरी दी जाए। गांव के सरकारी स्कूल का नाम 'अमर शहीद सुखचैन सिंह विद्यालय' रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें। गांव के मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जाए और उसका नाम 'शहीद सुखचैन सिंह द्वार' रखा जाए। शहीद के आश्रित परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाए।


 

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