Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 22 Sep, 2026 11:11 PM

श्मशान घाट के नवीनीकरण का 23 लाख रुपये का बिल पास करने के एवज में रिश्वतखोरी का खेल उजागर होने के बाद नगर निगम गुरुग्राम में हड़कंप मच गया है।
गुड़गांव, (ब्यूरो): श्मशान घाट के नवीनीकरण का 23 लाख रुपये का बिल पास करने के एवज में रिश्वतखोरी का खेल उजागर होने के बाद नगर निगम गुरुग्राम में हड़कंप मच गया है। 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए कंप्यूटर ऑपरेटर को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। वहीं, मामले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम अब नगर निगम के अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जो इस पूरे रिश्वतकांड के पीछे मुख्य सूत्रधार माने जा रहे हैं।
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एसीबी की तफ्तीश में सामने आया है कि गांव फाजिलपुर में श्मशान घाट के जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण का कार्य पूरा होने के बाद शिकायतकर्ता ने अपने 23 लाख रुपये के लंबित बिल का भुगतान कराने के लिए नगर निगम में आवेदन किया था। आरोप है कि नगर निगम के कार्यकारी अभियंता ने इस बिल को पास करने की एवज में कुल राशि का चार प्रतिशत (लगभग 92 हजार रुपये) बतौर रिश्वत की मांग की थी।
बिल पास करवाने के लिए शिकायकर्ता ने कार्यकारी अभियंता को रिश्वत देने के लिए राजी हो गया था। बिल पास करने के बाद कार्यकारी अभियंता के कंप्यूटर ऑपरेटर को 80 हजार रुपये की रिश्वत दी गई थी। उसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर शिकायकर्ता को बकाया 12 हजार रुपये की रिश्वत के लिए दबाव बना रहा था। ऐसे में परेशान होकर एसीबी को शिकायत दी और उसके बाद एसीबी ने 18 सिंतबर को रंगे हाथों नगर निगम कार्यालय से कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अगर वह 12 हजार रुपये नहीं देगा,तो उसके आगामी बिल पास नहीं करने की धमकी भी देने का आरोप है।
एसीबी की जांच में सामने आया है कि ठेकेदार के बिल की फाइल जेई और एसडीओ ने समय पर पास कर दी थी,लेकिन दस से ज्यादा दिनों तक बिल की फाइल को कार्यकारी अभियंता ने पास नहीं किया। ऐसे में बिल पास करने को लेकर ठेकेदार और कार्यकारी अभियंता के बीच नगर निगम के कार्यालय में झगड़ा हुआ था। ठेकेदार ने चार प्रतिशत कमीशन देने का विरोध किया था। उसके बाद कार्यकारी अभियंता ने कहा कि रुपये देने होंगे,तभी बिल पास होगा। उसके बाद परेशान होकर एसीबी में शिकायत दी थी।
एसीबी की रडार पर नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी आ गए हैं। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेटर महज एक जरिया था, जबकि रिश्वत का मुख्य फायदा बड़े अधिकारियों तक पहुंचना था। एसीबी की टीम अब संबंधित फाइलों, डिजिटल साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है,ताकि संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्यम जुटाकर आगामी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी के बाद एसीबी की रडार पर आए निगम के अधिकारियों ने कार्यालय से नदारद है। गिरफ्तारी के डर से अधिकारी लंबे अवकाश पर चले गए है और उनके फोन भी बंद आ रहे है। यह पहला मामला नहीं है,जबकि नगर निगम के अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप लगे है।