हरियाणा में यहां बनेगा जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

Edited By Manisha rana, Updated: 01 Mar, 2026 10:45 AM

organic agriculture modern management institute set up here in haryana

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि विकास मेला लाडवा में घोषणा करते हुए बड़ी सौगातें दी हैं। गांव मथाना में 10 एकड़ भूमि पर जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान खोला जाएगा। इस संस्थान में कृषि साइंस के यू.जी., पी.जी. से लेकर पीएच.डी. तक के कोर्स...

लाडवा : मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि विकास मेला लाडवा में घोषणा करते हुए बड़ी सौगातें दी हैं। गांव मथाना में 10 एकड़ भूमि पर जैविक कृषि व आधुनिक प्रबंधन प्रणाली संस्थान खोला जाएगा। इस संस्थान में कृषि साइंस के यू.जी., पी.जी. से लेकर पीएच.डी. तक के कोर्स उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही कैथल से यमुनानगर वाया ढांड, पिपली, रादौर मार्ग को फोरलेन किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने लाडवा उपमंडल सचिवालय के नए भवन, लोक निर्माण विभाग की 9 सड़कों का शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से लाडवा अनाज मंडी में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि विकास मेले का शुभारंभकिया। मुख्यमंत्री ने ट्रैक्टर पर बैठकर विश्वविद्यालय व किसानों द्वारा लगाए स्टॉलों और कृषि मेले का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कृषि विकास मेला को हरियाणा की कृषि आत्मा का उत्सव बताया जो अन्नदाताओं के परिश्रम, संकल्प और नवाचार का महोत्सव है।

किसानों तक ड्रोन, रिमोट सैंसिंग, ए.आई. आधारित निर्णय प्रणाली और डिजिटल खेती को पहुंचा रही सरकारः मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने खेती को बदल दिया है। ऐसे में सरकार ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, ए. आई. आधारित निर्णय प्रणाली और डिजिटल खेती जैसे नवाचारों को किसान भाइयों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगतिशील किसानों ने नवाचारों से कृषि क्षेत्र को गति दी है, जो हमारे अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। इस मेले का थीम जल संरक्षण प्रति बूंद से अधिक फसल रखा गया है। मौजूदा समय में बदलते जलवायु परिदृश्य, घटते भूजल स्तर और अनियमित वर्षा ने कृषि क्षेत्र के सामने अनेक नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण पर केंद्रित यह मेला वास्तव में दूरदर्शी पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखें बल्कि हर खेत व हर किसान तक पहुंचाएं। किसान और वैज्ञानिक का सीधा संवाद ही कृषि को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है। हमारी पहचान हमारे खेत-खलिहानों से है। किसान ऐसी फसलों की पैदावार लें, जिसमें पानी की कम जरूरत होती है। सरकार ने ऐसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना वर्ष 2020 में शुरू की। सैनी ने कहा कि सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के शोधित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 27 योजनाएं तैयार की हैं। इनमें से 11 पूरी हो चुकी हैं।

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