online ठगी के शिकार हो रहे नागरिक, पुलिस भी नहीं कर रही सहयोग

Edited By Isha, Updated: 17 Feb, 2020 11:29 AM

online citizens are being victim of fraud even police is not cooperating

बैंकों की कार्यप्रणाली में खामियों और पुलिस की लापरवाही के कारण साइबर सिटी के दर्जनों नागरिक प्रति माह ठगी के शिकार हो रहे हैं। लोग कार्ड के माध्यम से शहर में स्थित एटीएम से पैसे.....

गुडग़ांव (ब्यूरो) : बैंकों की कार्यप्रणाली में खामियों और पुलिस की लापरवाही के कारण साइबर सिटी के दर्जनों नागरिक प्रति माह ठगी के शिकार हो रहे हैं। लोग कार्ड के माध्यम से शहर में स्थित एटीएम से पैसे निकाल रहे हैं और पता नहीं कैसे बाद में उनके खाते से पैसे कोई दूसरा निकाल ले रहा है। लोगों का कहना है कि इसके लिए पूरी तरह से संबंधित बैंक और बैंकिंग सिस्टम जिम्मेदार है।

विडंबना तो यह है कि इस तरह के ठगी के शिकार लोगों की पीड़ा भी कोई सुनने वाला नहीं हैं। काफी ऐसे मामले दर्ज ही नहीं हो पाते हैं और जो दर्ज भी हुए तो उनका निस्तारण नहीं होता।  इसी तरह के ठगी के शिकार हुए गुरुगाम के पटेल नगर निवासी मार्कण्डेय पांडेय हुए। मामला भी दर्ज हुआ। बैंक से भी उन्होंने मुलाकात की लेकिन अब तक जानकारी नहीं हो पाई कि आखिर पैसे किसने और कैसे निकाल लिए।

उन्होंने बताया कि 3 फरवरी को रात्रि करीब 8 बजे वे सदर बाजार स्थित पंजाब नैशनल बैंक के एटीएम से पैसे निकाले। इसके बाद 4 फरवरी को दोपहर बाद करीब 1 बजे कुछ मिनट के अंदर में दो बार उनके खाते से क्रमश: 10 हजार और 4 हजार कुल 14 हजार रुपए निकाल लिए गए। पैसे निकलने का मैसेज मोबाइल आते ही पांडेय ने इसकी सूचना पीएनबी की सिविल लाइन स्थित शाखा पर जानकारी देने के साथ इससे पुलिस को भी अवगत कराए।

दोनों स्थानों से आश्वासन मिला लेकिन घटना के करीब 12 दिन बाद भी धोखाधड़ी से पैसे निकालने वाले तक पुलिस और बैंक के हाथ नहीं पहुंच पाए। जबकि आरबीआई द्वारा जुलाई 2017 में जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक अगर उपभोक्ता के खाते से अनाधिकारिक निकासी होती है तो 72 घंटे के अंदर शिकायत करने पर संबंधित बैंक उपभोक्ता का पैसा वापस करेगा।

यह कोई एक मामला नहीं बल्कि शहर में प्रतिदिन करीब आधा दर्जन ऐसे लोग साइबर क्राइम के शिकार होते हैं। कुछ की एफआईआर नहीं दर्ज होती तो कुछ दर्ज भी होती है तो ठगी के शिकार लोग लंबे समय तक पैसे की वापसी का इंतजार ही करते रहते हैं। इइ तरह के मामलों को साइबर सेल देखती है लेकिन इसके प्रति संबंधित विभाग की लापरवाही भी सामने आ रही है।    

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