कभी खाने के नहीं थे पैसे...अब UPSC में पाई 272वीं रैंक, पानीपत के अमित ने 6 साल की लड़ाई के बाद हासिल की सफलता

Edited By Krishan Rana, Updated: 03 Jun, 2026 07:08 PM

once without money for food  now ranked 272nd in upsc amit from panipat achiev

हरियाणा के पानीपत जिले के रहने वाले अमित टूर्ण ने संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के

पानीपत : हरियाणा के पानीपत जिले के रहने वाले अमित टूर्ण ने संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के संशोधित परिणाम में ऑल इंडिया 272वीं रैंक हासिल की है। आर्थिक तंगी, तकनीकी विवाद और छह साल लंबी कानूनी लड़ाई के बावजूद अमित ने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने सपने को साकार कर दिखाया। उनकी सफलता से जहां पूरा परिवार खुशी से झूम उठा, वहीं मां की आंखों से वर्षों के संघर्ष के आंसू खुशी बनकर छलक पड़े।

आर्थिक तंगी के बीच शुरू किया UPSC का सफर
अमित टूर्ण का सपना बचपन से ही UPSC परीक्षा पास कर देश सेवा करने का था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले अमित के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और साल 2017 से UPSC की तैयारी शुरू कर दी। अमित ने बताया कि आर्थिक परेशानियां हमेशा उनके सामने चुनौती बनकर खड़ी रहीं। साल 2019 में उन्होंने पहली बार UPSC परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंच गए, लेकिन अंतिम चरण में उनके आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग प्रमाण पत्र को लेकर तकनीकी विवाद खड़ा हो गया।

न्याय के लिए 6 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई
दरअसल, हरियाणा में EWS प्रमाण पत्र सामान्यत नायब तहसीलदार द्वारा जारी किए जाते हैं, जबकि UPSC केवल तहसीलदार स्तर के हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्र को मान्य मान रहा था. इसी कारण अमित समेत कई योग्य उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई.अमित ने हार मानने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया. करीब 6 वर्षों तक अदालत में संघर्ष करने के बाद उन्हें न्याय मिला और UPSC के संशोधित परिणाम में उनकी 272वीं रैंक घोषित हुई।

400 रुपये में गुजारे दिन, भाई बना सबसे बड़ा सहारा
अमित ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास केवल 400 रुपये बचे थे और भाई उनके कमरे पर आ गया था। दोनों ने कई दिनों तक एक ही सब्जी में पानी मिलाकर गुजारा किया। ऐसे हालातों में भी परिवार ने उनका हौसला टूटने नहीं दिया। अमित की मां बबली देवी ने बताया कि जब भी बेटा निराश होता था, वह उसे हौसला देती थीं और कहती थीं कि मेहनत का फल जरूर मिलेगा।  
 

(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)               

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!