मंदिर तोड़ा, सड़क पर हनुमान चालीसा, अब बिल्डर और रेजिडेंट्स के बीच पुलिस मौजूदगी में बैठक

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 18 Nov, 2025 09:07 PM

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सेक्टर-85 की पिरामिड हाइट्स सोसायटी में बने शिव मंदिर को ढहाने के बाद हुए विवाद में आज आखिरकार दोनों पक्षों में सुलह हो गई है। पुलिस मौजूदगी में बिल्डर, प्रशासन और रेजिडेंट्स की बैठक हुई।

गुड़गांव, (ब्यूरो): सेक्टर-85 की पिरामिड हाइट्स सोसायटी में बने शिव मंदिर को ढहाने के बाद हुए विवाद में आज आखिरकार दोनों पक्षों में सुलह हो गई है। पुलिस मौजूदगी में बिल्डर, प्रशासन और रेजिडेंट्स की बैठक हुई। इस मामले में गुरुग्राम के एसडीएम व एसीपी की मौजूदगी में सोसायटी के रेजिडेंट्स दोबारा मंदिर बनाने पर सहमत हो गए। ऐसे में मंगलवार को रेजिडेंट्स ने मंदिर का निर्माण पंडित की मौजूदगी में शुरू कर दिया।

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रेजिडेंट्स ने ढोल-बाजे के साथ अपनी जीत का जश्न भी मनाया। रेजिडेंट्स राज सैनी ने बताया कि पहले मंदिर सोसायटी के बाहर बना हुआ था, लेकिन अब मंदिर सोसायटी के अंदर गेट के साथ बनाया जा रहा है। ज्ञात हो कि गत सोमवार को डीटीपी अमित मधोलिया ने शिव मंदिर को तोड़ दिया था। जिसके बाद रेजिडेंट़्स ने रोष प्रकट करते हुए द्वारका एक्सप्रेसवे की सर्विस लाइन के ट्रैफिक को भी रोक दिया था और रोड पर ही बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया था। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और लोगों को काफी प्रयास के बाद रोड के बीच से हटाते हुए आज सभी पक्षों के साथ बैठक कर मामले की सुलह कराने का आश्वासन दिया था।

 

वहीं पिरामिड हाइट्स सोसायटी के रजिडेंट्स का कहना था कि मंदिर को तोड़ने के बारे में कोई नोटिस डीटीपी एन्फोर्समेंट की ओर से नहीं दिया गया। वहीं डीटीपी अमित मधोलिया ने कहा कि यह पूरी तरह अवैध रूप से बनाया गया था और अवैध निर्माण को हटाने के लिए उन्हें नोटिस देने की जरुरत नही होती। आस्था के प्रतीक मंदिर के तोड़े जाने से रेजिडेंट्स में रोष बन गया था। हालांकि इस मामले में जिला प्रशासन के प्रयास से मामला सुलझ गया और रेजिडेंट्स को मंदिर बनाने की परमिशन दिए जाने से उन्होंने राहत की सांस ली।

 

 रेजिडेंट्स राज सैनी ने बताया कि गत सोमवार को अचानक से मंदिर तोड़ दिया गया था, जबकि अधिकतर लोग नौकरीपेशा होने के चलते सोसायटी से बाहर गए हुए थे। लेकिन बाद में रेजिडेंट्स के रोष को देखते हुए जिला प्रशासन ने नरमी बरती और फिर मंदिर बनाने की अनुमति दी है।

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