मास्टर माइंड’ से ‘टास्क मास्टर’ साबित हो रहे हैं मनोहर लाल! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माने जाते हैं भरोसेमंद

Edited By Krishan Rana, Updated: 09 Jun, 2026 08:57 PM

manohar lal is proving to be a task master rather than just a mastermind he

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के प्रधानमंत्री के रूप

नई दिल्ली (संजय अरोड़ा): हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्षों के कार्यकाल को विकासकाल बताते हुए कहा कि देश के इतिहास में यह दौर एक स्वर्णिम अध्याय है। इस अवधि में देश आर्थिक रूप से पहले से मजबूत हुआ है और भारत दुनिया की सबसे उभरती हुई अर्थव्यवस्था बना है।

मनोहर लाल खट्टर ने इस अवधि के दौरान ऊर्जा एवं शहरी विकास विभाग में हुए अभूतपूर्व विकास को लेकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कुछ पोस्टर शेयर किए हैं। उनके अनुसार 2013-14 तक देश में ऊर्जा की शॉर्टज 4.2 प्रतिशत थी जो 2025-26 में केवल 0.33 प्रतिशत रह गई है। इस दौरान 2.86 करोड़ परिवारों को बिजली के नए कनैक्शन दिए गए। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4.15 करोड़ परिवारों को कनैक्शन दिए गए। मनोहर लाल के अनुसार इन 12 वर्षों में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया।

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा होने के सिलसिले में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने फेसबुक पेज पर लिखा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही के दिन 2024 में तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर सुशासन, सेवा और जनकल्याण की ऐतिहासिक यात्रा को एक नई निरंतरता प्रदान की थी। इस गौरवपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। पिछले 12 वर्षों में अंत्योदय के संकल्प को केंद्र में रखकर संचालित नीतियों की वजह से करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

गरीब, वंचित, किसान, महिला तथा युवा, सभी वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में हुए अद्वितीय कार्यों ने भारत के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। प्रधानमंत्री का दूरदर्शी, निर्णायक और जनकेंद्रित नेतृत्व आज भारत को आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयामों की ओर अग्रसर कर रहा है। ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की यह अनवरत यात्रा राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला रख रही है। जनसेवा के प्रति प्रधानमंत्री के अविराम समर्पण को मेरा सादर नमन!’

ऊर्जा सुधार पर है खास फोकस

गौरतलब है कि 9 जून 2024 को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्र सरकार में ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली थी। प्रशासनिक अनुभव, अनुशासित कार्यशैली और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के लिए पहचाने जाने वाले मनोहर लाल ने बीते दो वर्षों में दोनों मंत्रालयों में अनेक महत्वपूर्ण पहलें की हैं। उनका कार्यकाल ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा, आधुनिक शहरी ढांचे और स्वच्छता आधारित विकास की दिशा में उल्लेखनीय माना जा रहा है।

खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्री बनने से पहले करीब साढ़े 9 वर्ष हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे और जब-जब भी प्रधानमंत्री ने उन्हें कोई भी टास्क दिया गया, उसे उन्होंने अपने मास्टर माइंड व रणनीति से पूरा करके दिखाया और अब केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा दिए जाने वाले हर टास्क पर वे खरा उतरते हुए नजर आ रहे हैं। ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद मनोहर लाल ने देश की बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया।

भारत की बिजली जरूरतों में लगातार वृद्धि को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया गया। हाल ही में उन्होंने यह लक्ष्य रखा कि देश की ऊर्जा क्षमता को लगभग 300 गीगावाट तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 तक देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 1.54 लाख मैगावाट से अधिक पहुंच चुकी थी, जबकि पवन ऊर्जा क्षमता भी 56 हजार मैगावाट से अधिक हो गई थी। मनोहर लाल के कार्यकाल में पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया। इस योजना का उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है। अप्रैल 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 9.56 गीगावाट की रूफटॉप सौर क्षमता जोड़ी जा चुकी थी।

सरकार का अनुमान है कि इससे आने वाले वर्षों में बड़ी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और आम परिवारों को बिजली बिलों में उल्लेखनीय राहत मिलेगी। ऊर्जा क्षेत्र में स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसमिशन लॉस में कमी और वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास हुए। राज्यों के साथ लगातार समीक्षा बैठकों के माध्यम से बिजली क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान तलाशने का प्रयास किया गया। मनोहर लाल ने विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ संवाद को प्राथमिकता दी, जिससे संघीय ढांचे के अनुरूप निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत हुई।

शहरी विकास मंत्रालय में भी पिछले दो वर्षों के दौरान अनेक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिलीं। स्वच्छ भारत मिशन (अर्बन) 2.0 के तहत कचरा प्रबंधन, डंपिंग स्थलों के निस्तारण, सार्वजनिक शौचालयों के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। शहरों को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में मिशन मोड में कार्य हुआ। इसी प्रकार अमृत 2.0 योजना के तहत जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और शहरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कार्य जारी रहा। तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार की गईं।

स्मार्ट सिटी मिशन परियोजनाओं की लगातार कर रहे हैं समीक्षा

खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने दो साल के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा कर कई शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सैंटर, स्मार्ट सडक़ें, आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली, एलईडी स्ट्रीट लाइटिंग और ई-गवर्नेंस सेवाओं को गति दी। नागरिक सुविधाओं को तकनीक से जोडऩे की दिशा में मंत्रालय ने विशेष ध्यान दिया।

मैट्रो परियोजनाओं के विस्तार को लेकर भी मनोहर लाल सक्रिय रहे। विभिन्न राज्यों की प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा कर उन्हें गति देने का प्रयास किया गया। महानगरों के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में योजनाएं बनाई गईं। मैट्रो नेटवर्क के विस्तार को शहरी प्रदूषण कम करने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन दो वर्षों में मनोहर लाल ने केवल मंत्रालयों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा। वे विभिन्न राज्यों के दौरे पर जाकर परियोजनाओं की समीक्षा करते रहे।

विदेश यात्राओं के दौरान भी उन्होंने ऊर्जा विकास, शहरी विकास और सतत विकास से जुड़े वैश्विक अनुभवों को समझने का प्रयास किया। उनकी कार्यशैली की विशेषता यह रही कि वे अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें कर समयबद्ध लक्ष्य तय करते हैं और उनकी निरंतर समीक्षा भी करते हैं। कुल मिलाकर केंद्रीय मंत्री के रूप में दो वर्षों में उनका कार्यकाल ऊर्जा आत्मनिर्भरता, हरित ऊर्जा विस्तार, आधुनिक शहरी विकास और स्वच्छता आधारित प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री के अनुभव और संगठनात्मक पृष्ठभूमि ने उन्हें केंद्र में भी परिणाम देने वाला मंत्री साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

फाइलों से फील्ड तक एक्टिव नजर आते हैं मनोहर लाल

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की पहचान केवल एक प्रशासक के रूप में नहीं बल्कि एक कर्मठ संगठनकत्र्ता के रूप में भी रही है। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने संगठन से अपने जुड़ाव को बनाए रखा। विभिन्न राज्यों में पार्टी की बैठकों में शिरकत करना, कार्यकत्र्ताओं के साथ संवाद करना और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है। वे अक्सर परियोजनाओं की प्रगति की जमीनी समीक्षा करते हैं और अधिकारियों को स्पष्ट समय-सीमा के साथ लक्ष्य निर्धारित करते हैं। फाइलों से लेकर वे फील्ड तक पूरी तरह से एक्टिव नजर आते हैं। ऊर्जा और शहरी विकास मंत्रालयों से जुड़े कार्यों के सिलसिले में उन्होंने देश के सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा किया तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान तलाशने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माने जाते हैं भरोसेमंद

खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भरोसेमंद माना जाता है। साल 2014 में जब वे पहली बार करनाल से विधायक चुने गए तब मोदी ने ही उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। इसी तरह से साल 2019 में एक बार फिर से शीर्ष नेतृत्व ने खट्टर पर भरोसा बरकरार रखा और उन्हें दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया। 9 वर्ष 138 दिनोंं तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मनोहर लाल ने व्यवस्था परिवर्तन को लेकर कई ऐतिहासिक कदम उठाए। खास बात यह है कि उनकी ओर से लागू की गई अनेक योजनाओं का दूसरे राज्यों ने अनुसरण किया।

सादगी, शराफत, पारदर्शिता व ईमानदारी केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की सबसे बड़ी पहचान है। मुख्यमंत्री रहते हुए जिस सरल जीवनशैली के लिए वे जाने जाते थे, केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी उसमें कोई बदलाव नहीं आया। अनुशासन, समय की पाबंदी, तथ्य आधारित निर्णय और टीमवर्क में विश्वास उनकी प्रशासनिक शैली के प्रमुख तत्व हैं। यही कारण है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर वे एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में देखे जाते हैं, जो बिना शोर-शराबे के परिणाम देने में विश्वास रखते हैं।

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