Edited By Krishan Rana, Updated: 01 Jun, 2026 05:41 PM

पंजाब में भाजपा के विस्तार अभियान में सक्रिय दिख रहे हैं तरुण भंडारी, राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा पंजाब की
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): पंजाब में भाजपा के विस्तार अभियान में सक्रिय दिख रहे हैं तरुण भंडारी, राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा पंजाब की राजनीति और आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लगातार पंजाब के दौरे कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इन दौरों और भाजपा के संगठनात्मक विस्तार अभियान में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भाजपा और सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तरुण भंडारी को मुख्यमंत्री तथा पार्टी नेतृत्व का विश्वासपात्र रणनीतिक सहयोगी माना जाता है। हरियाणा में विभिन्न राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी की चर्चा लंबे समय से होती रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पंजाब में भाजपा के विस्तार प्रयासों के दौरान भी उनकी भूमिका प्रमुखता से सामने आई है।
विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व से संवाद स्थापित कर भाजपा समाज के विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसी संदर्भ में तरुण भंडारी को मुख्यमंत्री और धार्मिक नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने वाले प्रमुख चेहरों में गिना जा रहा है।
मुख्यमंत्री की संत-महात्माओं, गुरुद्वारों, मंदिर समितियों और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों से हुई मुलाकातों को सामाजिक संवाद और जनसंपर्क की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी दावा किया जाता है कि चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित विभिन्न बैठकों और संपर्क अभियानों के माध्यम से पंजाब के अनेक नेताओं को भाजपा से जोड़ने में तरुण भंडारी ने सक्रिय भूमिका निभाई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
तरुण भंडारी को केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के करीबी सहयोगियों में माना जाता है। राजनीतिक जीवन में वे कभी कांग्रेस से भी जुड़े रहे और प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वर्ष 2019 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है।
भंडारी मूल रूप से पंजाब से संबंध रखते हैं और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ उनके संपर्कों की चर्चा होती रही है। बताया जाता है कि मनोहर लाल के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने कई प्रमुख धार्मिक हस्तियों से संवाद स्थापित करने में भूमिका निभाई थी। वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ भी उनकी कई धार्मिक नेताओं से मुलाकातों का उल्लेख राजनीतिक हलकों में किया जाता है।
राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान विशेष रूप से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के राज्यसभा चुनावों के बाद चर्चा में आई। उनके समर्थकों का दावा है कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने में योगदान दिया। वहीं आलोचक विभिन्न चुनावी घटनाक्रमों को लेकर उनके खिलाफ आरोप भी लगाते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवादों के दौरान उनका नाम राजनीतिक बहस का विषय बना था। हालांकि इन मामलों पर संबंधित पक्षों के अपने-अपने दावे और तर्क रहे हैं।
भाजपा में शामिल होने वाले कई प्रमुख नेताओं के संदर्भ में भी तरुण भंडारी का नाम सामने आता रहा है। राजनीतिक चर्चाओं में किरण चौधरी, श्रुति चौधरी, नवीन जिंदल और अशोक तंवर जैसे नेताओं के भाजपा में आने के पीछे उनकी रणनीतिक भूमिका की चर्चा की जाती रही है। हालांकि इन निर्णयों के पीछे अनेक राजनीतिक और व्यक्तिगत कारक भी माने जाते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तरुण भंडारी की कार्यशैली चुनावी गणित, संगठनात्मक संपर्कों और राजनीतिक संवाद को केंद्र में रखकर आगे बढ़ती है। समर्थकों के अनुसार वे असंतोष के बिंदुओं की पहचान कर राजनीतिक अवसरों को रणनीति में बदलने की क्षमता रखते हैं। जब मनोहर लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, उस समय तरुण भंडारी उनके पब्लिसिटी एडवाइजर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में उनकी भूमिका केवल जनसंपर्क तक सीमित न रहकर राजनीतिक प्रबंधन और संगठनात्मक रणनीति तक विस्तारित हुई है।
भाजपा के भीतर उन्हें ऐसे रणनीतिक चेहरे के रूप में देखा जा रहा है जो राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करने और संगठनात्मक लक्ष्यों के अनुरूप उन्हें साधने की क्षमता रखते हैं। इसी कारण हरियाणा के बाद अब पंजाब की राजनीति में भी तरुण भंडारी का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है, जहां उन्हें भाजपा के विस्तार अभियान से जुड़े प्रमुख रणनीतिक चेहरों में से एक माना जा रहा है।
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