Edited By Krishan Rana, Updated: 23 Feb, 2026 05:12 PM

हरियाणा सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने राज्य के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के प्रति गंभीर लापरवाही
चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने राज्य के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के प्रति गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। वर्ष 2019 से 2025 तक कैश अवॉर्ड, छात्रवृत्ति और खेल कोटे की नौकरियों के आवेदनों में बड़ी संख्या में अस्वीकृति और लंबित मामलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने विधानसभा सत्र में इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
सुरजेवाला ने सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों का हवाल देते हुए कहा कि कैश अवॉर्ड योजना के तहत 2019 से अब तक कुल 11,489 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से मात्र 6,987 स्वीकार किए गए। बाकी आवेदनों में बड़ी संख्या अस्वीकृत हुई, जबकि 1,361 आवेदन अभी भी लंबित हैं। छात्रवृत्ति योजना में स्थिति और भी खराब है – कुल 26,408 आवेदन आए, जिनमें केवल 16,415 स्वीकृत हुए और 2,209 लंबित पड़े हैं। विशेष रूप से चिंताजनक है हाल के वर्षों का रुझान है 2023 में 370 आवेदन लंबित रहे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 684 हो गई। 2025 में भी 307 आवेदन अभी तक निपटाए नहीं गए।
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि जब हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर हरियाणा का नाम रोशन कर रहे हैं, तब उनके पुरस्कार और छात्रवृत्तियाँ समय पर क्यों नहीं मिल रही? इतनी बड़ी संख्या में अस्वीकृति के पीछे क्या मापदंड हैं? क्या पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है?
खेल कोटे की नौकरियों में स्थिति और भी दयनीय है।आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्सपर्सन (ओएसपी) और एलिजिबल स्पोर्टस्पर्सन (ईएसपी) कोटे के तहत अप्रैल 2021 के बाद ग्रुप A में केवल 1 नियुक्ति हुई। OSP और ESP नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ी ग्रुप A और ग्रुप B की नौकरियों के लिए पात्र होते हैं। ग्रुप बी में वर्ष 2020 से अब तक केवल 9 नियुक्तियाँ दी गई हैं। अधिकांश नियुक्तियाँ केवल ग्रुप सी और डी तक ही सीमित रखी गई हैं।
इसके बावजूद उन्हें इन श्रेणियों में नियुक्ति नहीं दी जा रही है। एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक खेलों में प्रदेश और देश का नाम रोशन करने वाले अनेक खिलाड़ियों के होते हुए भी उन्हें ग्रुप A और ग्रुप B के पदों पर अवसर नहीं दिया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है।
विधायक सुरजेवाला ने सरकार से सवाल किया कि उच्च श्रेणी की नौकरियों में खिलाड़ियों को अवसर क्यों नहीं मिल रहे, जबकि वे प्रदेश का गौरव बढ़ाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय प्रक्रिया अत्यधिक धीमी है या बजट प्रबंधन में गंभीर कमी है। दो-दो वर्षों से लंबित आवेदन खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को समय पर उनका कैश अवॉर्ड नहीं मिल पाता, जो उनके प्रशिक्षण के खर्च को पूरा करने में सहायक होता। इसी वजह से कई खिलाड़ी ओवरएज हो जाते हैं या मजबूरी में खेल छोड़ना पड़ता है। आदित्य सुरजेवाला ने सरकार से मांग की कि तत्काल प्रभाव से स्पष्टीकरण दें कि लंबित आवेदनों के निपटान की समय-सीमा क्या है? क्या इसके लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है? अस्वीकृत आवेदनों की समीक्षा के लिए कोई स्वतंत्र व्यवस्था है?
सुरजेवाला ने कहा कि खिलाड़ी केवल पदक नहीं जीतते, वे प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाते हैं। उनके अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। भाजपा सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि खिलाड़ियों का विश्वास बहाल हो सके।
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